Mother of All Deals: भारत–यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता, वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदलेगा
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वैश्विक व्यापार जगत में नई इबारत लिखने जा रहा है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संकेत दिए कि भारत और EU एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब हैं। इस डील को “मदर ऑफ ऑल डील्स” नाम दिया गया है, जो इसके व्यापक प्रभाव और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 26 जनवरी को इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं।
अमेरिका की अनिश्चितता बनी वजह
इस समझौते की टाइमिंग बेहद अहम मानी जा रही है। एक ओर अमेरिका के साथ भारत का व्यापार समझौता लंबे समय से अधर में है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका द्वारा यूरोपीय संघ पर हाई टैरिफ और भारतीय उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने की धमकियों ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे में यूरोपीय संघ ने भारत की ओर रणनीतिक रूप से कदम बढ़ाया है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन के अनुसार, “यूरोप हमेशा दुनिया के साथ खड़ा रहेगा, और अब दुनिया भी यूरोप को चुनने के लिए तैयार है।”
क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय नेताओं के अनुसार यह समझौता 2 अरब से अधिक आबादी का साझा बाजार तैयार करेगा। यह संयुक्त बाजार वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा, जिससे इसके आर्थिक प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
चीन की चुनौती भी बड़ा कारण
भारत और यूरोपीय संघ के करीब आने के पीछे चीन की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। भारत सोलर एनर्जी समेत कई क्षेत्रों में चीन की आक्रामक मूल्य नीति से जूझ रहा है, जबकि यूरोप महत्वपूर्ण तकनीकों में चीन के वर्चस्व और उससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को लेकर सतर्क है। यह डील दोनों पक्षों को चीन पर निर्भरता कम करने और सुरक्षित व भरोसेमंद सप्लाई चेन विकसित करने में मदद करेगी।
भारत और EU को क्या मिलेगा
इस समझौते से भारत को यूरोपीय बाजार में कपड़ा, जूते-चप्पल, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों में बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं, यूरोपीय संघ को भारत में ऑटोमोबाइल, पेय पदार्थ और अन्य प्रीमियम उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच मिल सकती है।
दो दशकों की मेहनत का नतीजा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत–EU FTA लगभग 20 वर्षों की बातचीत का परिणाम है। 2007 में शुरू हुई वार्ता 2013 में ठप हो गई थी, लेकिन 2022 में इसे फिर से गति मिली। अब जब गणतंत्र दिवस समारोह में EU के शीर्ष नेता भारत के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि भारत वैश्विक व्यापार का नया केंद्र बनकर उभर रहा है।
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