नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर ट्रंप का बयान, नॉर्वे के प्रधानमंत्री को भेजा संदेश

Trump Nobel Prize:नोबेल शांति पुरस्कार 2025 के ऐलान को छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब भी यह मुद्दा नहीं भूल पाए हैं। इसी क्रम में डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को एक संदेश भेजा है, जिसमें उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (PBS) के अनुसार, ट्रंप ने अपने संदेश में कहा है कि नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के बाद अब उन्हें “पूरी तरह शांति” के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शांति उनके लिए अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ वह यह भी सोचने के लिए स्वतंत्र हैं कि अमेरिका के लिए क्या सही और उचित है। ट्रंप ने इस संदेश में नोबेल शांति पुरस्कार की मेजबानी में नॉर्वे की भूमिका को अपनी व्यापक विदेश नीति और सुरक्षा संबंधी मांगों से जोड़कर देखा है।

ट्रंप का पूरा संदेश
डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, “यह देखते हुए कि आपके देश ने आठ से अधिक युद्ध रोकने के लिए मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं देने का फैसला किया, अब मुझे पूरी तरह शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती। शांति हमेशा एक प्रमुख विषय रहेगी, लेकिन अब मैं यह भी सोच सकता हूं कि अमेरिका के लिए क्या अच्छा और उचित है।”

ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर उठाए सवाल
अपने संदेश में ट्रंप ने डेनमार्क की ग्रीनलैंड पर संप्रभुता को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि न तो डेनमार्क और न ही मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था ग्रीनलैंड को रूस या चीन जैसी बड़ी शक्तियों से बचा सकती है। ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क के पास ग्रीनलैंड पर स्वामित्व का कोई ठोस लिखित अधिकार नहीं है, केवल यह दावा किया जाता है कि सैकड़ों साल पहले वहां एक नाव उतरी थी, जबकि अमेरिकी नावें भी वहां पहुंची थीं। उन्होंने दावा किया कि जब तक ग्रीनलैंड पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण नहीं होगा, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं हो सकती।

नाटो को लेकर भी दिया बयान
ट्रंप ने अपने संदेश में नाटो को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नाटो के गठन के बाद से किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में उन्होंने नाटो के लिए अधिक काम किया है। अब समय आ गया है कि नाटो भी अमेरिका के लिए कुछ ठोस कदम उठाए।

ट्रंप के इस संदेश के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के हलकों में एक बार फिर उनके बयानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

 

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