राफेल डील ऑपरेशनल जरूरत, तेजस Mk2 और AMCA पर नहीं पड़ेगा असर: वायुसेना

भारत के सैन्य योजनाकारों के अनुसार राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पूरी तरह से एक ऑपरेशनल जरूरत है। भारतीय वायुसेना में फाइटर स्क्वाड्रन की लगातार घटती संख्या और क्षेत्रीय चुनौतियों को देखते हुए युद्ध क्षमता को दुश्मनों से ऊपर बनाए रखने के लिए राफेल जेट खरीदे जा रहे हैं।

भारतीय वायुसेना की ताकत को और मजबूत करने के उद्देश्य से रक्षा खरीद बोर्ड (डीपीबी) ने 114 राफेल मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अगली पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया और रक्षा विश्लेषकों के बीच यह बहस छिड़ गई कि इतने बड़े पैमाने पर विदेशी लड़ाकू विमानों की खरीद से कहीं भारत के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम पर असर तो नहीं पड़ेगा।

इन अटकलों के बीच भारतीय वायुसेना ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि तेजस Mk2 और AMCA के लिए फंडिंग और विकास की समय-सीमा राफेल डील से पूरी तरह अलग है। वायुसेना के अनुसार स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम के वित्तीय या विकासात्मक रोडमैप पर राफेल खरीद का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

डीपीबी से हरी झंडी मिलने के बाद अब 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक में पेश किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) से अंतिम स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद डील को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार भारत और फ्रांस अगले महीने ही 114 राफेल जेट की खरीद के अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

तेजस Mk2 और AMCA को लेकर भी अहम अपडेट सामने आए हैं। तेजस Mk2, हल्के लड़ाकू विमान तेजस का उन्नत संस्करण है, जो मिराज 2000 और जगुआर जैसे पुराने विमानों की जगह लेगा। यह एक शक्तिशाली मध्यम-वजन का फाइटर जेट होगा। इसके विकास कार्य में तेजी लाई गई है और इस वर्ष के अंत तक इसके पहले प्रोटोटाइप की पहली उड़ान होने की संभावना है।

वहीं AMCA परियोजना भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ लड़ाकू तकनीक में प्रवेश का प्रतीक मानी जा रही है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर भी लगातार काम चल रहा है। वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के मुताबिक 114 राफेल जेट की खरीद एक अलग रणनीतिक योजना का हिस्सा है, जिसका स्वदेशी परियोजनाओं से कोई टकराव नहीं है।

सैन्य योजनाकारों का कहना है कि राफेल डील मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के लिए है, जबकि तेजस Mk2 और AMCA भारतीय वायुसेना की भविष्य की हवाई शक्ति की रीढ़ बनेंगे। राफेल पर होने वाले खर्च से न तो AMCA के लिए जरूरी रिसर्च प्रभावित होगी और न ही तेजस Mk2 के औद्योगिक विस्तार में कोई कमी आएगी।

 

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