ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर, ट्रंप की पोस्ट से वैश्विक राजनीति में हलचल

तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान में सड़कों पर जारी विरोध-प्रदर्शन अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने तेहरान से लेकर मॉस्को तक सनसनी फैला दी है। ट्रंप द्वारा ईरानी प्रदर्शनकारियों को खुला समर्थन दिए जाने के बाद यह कयास तेज हो गए हैं कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरानी प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्हें “देशभक्त” बताया और लिखा कि “विरोध जारी रखो और अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो।” उन्होंने ईरान के दमनकारी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपने कृत्यों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ट्रंप ने ईरान से जुड़ी सभी कूटनीतिक बैठकों को रद्द करने की घोषणा भी की और “MIGA (मेक ईरान ग्रेट अगेन)” का नारा दिया।

हवाई हमले के संकेत?
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के अनुसार, अमेरिका ईरान को लेकर “मजबूत विकल्पों” पर विचार कर रहा है, जिनमें हवाई हमले भी शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही आर्थिक मोर्चे पर भी दबाव बढ़ाया गया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर अमेरिका 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा।

रूस और ईरान का सख्त रुख
ट्रंप की चेतावनी के बाद रूस भी सक्रिय हो गया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बाहरी ताकतों द्वारा भड़काई गई अस्थिरता मध्य पूर्व और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। रूस ने स्पष्ट किया कि वह ईरान में किसी भी अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करेगा।

वहीं ईरान ने भी कड़ा पलटवार किया है। ईरान के रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी कि किसी भी हमले का जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे और अमेरिका का साथ देने वाले देश ईरानी मिसाइलों के निशाने पर होंगे।

निर्वासित क्राउन प्रिंस की अपील
ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने भी बयान जारी किया है। उन्होंने ट्रंप के संदेश का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया ईरानी जनता के साहस को देख रही है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन दूर नहीं है। पहलवी ने विशेष रूप से ईरानी सेना से अपील करते हुए कहा कि वे जनता के साथ खड़े हों और शासन का साथ छोड़ दें।

फिलहाल ईरान की सड़कों पर बढ़ता तनाव और वॉशिंगटन से आ रही सख्त चेतावनियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि मध्य पूर्व एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो क्षेत्र में बड़े टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

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