गुस्ताखी माफ़ हरियाणा -पवन कुमार बंसल
अब जमाना सोशल मीडिया का तीस साल तक प्रिंट मीडिया और इंडिया के बेहतरीन अखबारों इंडियन एक्सप्रेस और जनसत्ता में
कुलदीप नैयर, बी जी वर्गीज़ प्रभाष जोशी, ओम थानवी , श्जितेंद्र बजाज की छतरछाया में पत्रकारिता करके
अब डंके के चोट पर कह रहा हूँ की अब समय सोशल मीडिया का है। जनसत्ता भी वो जनसत्ता नही रहा। हां इंडियन एक्सप्रेस में राजकमल साहिब ने जान डाली है। वरना पहले तो इंडियन एक्सप्रेस भी वो नहीं रहा था जो कभी स्वर्गीय रामनाथ गोयनका का सपना था।झा साहिब मुझे जनसत्ता से इंडियन एक्सप्रेस में लाये थे। मेनस्ट्रीम मीडिया तो
पेड न्यूज़ और एड्स के चक्र में अपनी साख खो चूका है। हालाँकि सोशल मीडिया की भी बुराइयाँ है।वैसे अभी वक्त है। नहीं सम्हला तो फिर चाह कर भी नहीं सम्हाल पायेगा।
बकौल शायर तुम्हारी दासतान भी न होगी दास्तानों में।
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