अब नहीं तो कभी नहीं: पत्रकार उपेक्षा पर निर्वाण फाउंडेशन का सीधा प्रहार
प्रधानमंत्री, नीति आयोग व मंत्रालयों को सौंपा राष्ट्रीय मांग पत्र – “पत्रकार असुरक्षित तो लोकतंत्र खतरे में”
मोदीनगर- गाजियाबाद नई दिल्ली: देश के पत्रकारों के अधिकारों को लेकर निर्वाण फाउंडेशन ने आज वह सवाल उठा दिया है, जिसे वर्षों से सत्ता गलियारों में दबाया जाता रहा है।
फाउंडेशन ने माननीय प्रधानमंत्री, उपाध्यक्ष राष्ट्रीय नीति आयोग एवं संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को ऑनलाइन माध्यम से एक आक्रामक राष्ट्रीय मांग पत्र भेजते हुए साफ शब्दों में कहा है—
“जो पत्रकार सत्ता से सवाल करता है, वही आज सबसे अधिक बेसहारा है।”
लोकतंत्र का सबसे कमजोर स्तंभ बना दिया गया पत्रकार
निर्वाण फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि
देश का चौथा स्तंभ कहलाने वाला पत्रकार आज—
बिना वेतन काम कर रहा है
बिना सुरक्षा मैदान में उतर रहा है
बिना बीमा जान जोखिम में डाल रहा है,
और मरने के बाद भी उसका परिवार बेसहारा रह जाता है
यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना है।
“जहाँ सब रुक जाते हैं, वहाँ पत्रकार भेजा जाता है”
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि— आपदा हो, दंगा हो, भ्रष्टाचार हो, माफिया हो या सत्ता की विफलता—
हर जगह सबसे पहले पत्रकार भेजा जाता है,
लेकिन न उसे सुरक्षा दी जाती है, न सम्मान, न भविष्य।
बिना हथियार, बिना कवच—पत्रकार को सच की लड़ाई में झोंक दिया गया है।
सरकार से सीधे सवाल
निर्वाण फाउंडेशन ने सरकार से सवाल पूछा है—
क्या पत्रकार इंसान नहीं है?
क्या उसके परिवार को सुरक्षा की ज़रूरत नहीं?
क्या लोकतंत्र केवल चुनाव के समय याद आता है?
निर्वाण फाउंडेशन की आक्रामक राष्ट्रीय मांगें
फाउंडेशन ने साफ कहा है कि अब केवल आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए—
सभी पत्रकारों के लिए न्यूनतम मासिक मानदेय कानूनन तय हो
₹25 लाख का जीवन व दुर्घटना बीमा तत्काल लागू हो
राष्ट्रीय पत्रकार संरक्षण कानून बिना विलंब लाया जाए
शहीद/घायल पत्रकारों के परिजनों को स्थायी पेंशन व नौकरी मिले
स्वास्थ्य, पेंशन, पी एफ , आवास व शिक्षा अधिकार के रूप में दिए जाएँ
डिजिटल व फ्रीलांस पत्रकारों को भी पूर्ण मान्यता व संरक्षण मिले
1 अप्रैल 2026 : सरकार की नीयत की अग्नि परीक्षा
निर्वाण फाउंडेशन ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि— हिन्दू नव वर्ष 1 अप्रैल 2026 को
यदि सरकार पत्रकारों के लिए
मानदेय, सामाजिक सुरक्षा व कल्याण योजनाओं की ऐतिहासिक घोषणा
“राष्ट्रीय उपहार” के रूप में नहीं करती—
तो यह माना जाएगा कि
सरकार चौथे स्तंभ को केवल भाषणों में मानती है, व्यवहार में नहीं।
स्पष्ट और अंतिम संदेश
निर्वाण फाउंडेशन ने दो टूक कहा—
पत्रकार सुरक्षित नहीं ⇒ सत्य असुरक्षित
सत्य असुरक्षित ⇒ लोकतंत्र कमजोर
और कमजोर लोकतंत्र ⇒ देश खतरे में
अब चुप्पी नहीं चलेगी।
अब उपेक्षा नहीं चलेगी।
अब निर्णय लेना ही होगा।
(लोकतंत्र, पारदर्शिता एवं जनहित के लिए समर्पित)
