‘यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं’ — हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा: केवल स्क्रूटनी का है अधिकार

  • रिपोर्ट: मंजय वर्मा

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए इसे अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिनियम में केवल सन्निरीक्षा (स्क्रूटनी) का ही प्रावधान है, न कि पुनर्मूल्यांकन का।

यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति विवेक सरन की एकल पीठ ने पुनर्मूल्यांकन की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश मेरठ निवासी फैज कमर द्वारा दाखिल याचिका पर सुनाया गया।

याची फैज कमर ने वर्ष 2025 की इंटरमीडिएट परीक्षा में भाग लिया था। परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट होकर उन्होंने हिंदी और जीव विज्ञान विषयों में स्क्रूटनी के लिए आवेदन किया। 5 अगस्त 2025 को यूपी बोर्ड कार्यालय में उन्हें उनकी उत्तर पुस्तिकाएं दिखायी गईं, लेकिन वे दोनों विषयों में कई प्रश्नों पर दिए गए अंकों से संतुष्ट नहीं हुए।

इसके बाद याची ने उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग करते हुए क्षेत्रीय सचिव को प्रत्यावेदन दिया, जिसे 9 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया गया। इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यूपी बोर्ड की परीक्षा प्रणाली में पुनर्मूल्यांकन की कोई व्यवस्था नहीं है और केवल स्क्रूटनी के माध्यम से ही उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का प्रावधान किया गया है। ऐसे में पुनर्मूल्यांकन की मांग कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

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