इतिहास रचने को तैयार इसरो: बाहुबली रॉकेट LVM3 की सबसे बड़ी कमर्शियल उड़ान LVM3-M6

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी है। इसरो का सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3, जिसे ‘बाहुबली’ के नाम से जाना जाता है, अपनी अब तक की सबसे बड़ी कमर्शियल उड़ान LVM3-M6 मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है। यह ऐतिहासिक प्रक्षेपण 24 दिसंबर 2024 की सुबह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा।

इसरो का सबसे भारी कमर्शियल मिशन
LVM3-M6 मिशन के तहत अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। यह इसरो का अब तक का सबसे भारी कमर्शियल मिशन माना जा रहा है। इस मिशन के जरिए न केवल इसरो की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन होगा, बल्कि वैश्विक मोबाइल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी एक नई क्रांति की शुरुआत होगी।

अंतरिक्ष में विशालकाय ‘मोबाइल टावर’
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 कोई साधारण उपग्रह नहीं है। इसे लो अर्थ ऑर्बिट में भेजा जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 223 वर्ग मीटर का विशाल फेज्ड-एरे एंटीना है, जो आकार में एक छोटे घर के बराबर है। यह उपग्रह अंतरिक्ष में एक विशाल मोबाइल टावर की तरह काम करेगा।

अंतरिक्ष से सीधे स्मार्टफोन को मिलेगा सिग्नल
करीब 6500 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट LVM3 द्वारा ले जाया जाने वाला अब तक का सबसे भारी एकल पेलोड है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘स्पेस-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड’ उपलब्ध कराना है। यानी अब बिना किसी ज़मीनी मोबाइल टावर के भी साधारण स्मार्टफोन पर सीधे अंतरिक्ष से नेटवर्क सिग्नल मिल सकेगा।

आम आदमी के लिए क्यों है खास
यह मिशन संचार के क्षेत्र में दूरियों को पूरी तरह खत्म कर देगा। पहाड़ों, रेगिस्तानों, घने जंगलों या समुद्र के बीच, जहां मोबाइल टावर लगाना संभव नहीं है, वहां भी 4G और 5G सेवाएं उपलब्ध होंगी। वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, टेक्स्ट मैसेजिंग और हाई-स्पीड इंटरनेट बिना किसी रुकावट के संभव हो सकेगा।

लॉन्च से कक्षा तक का सफर
24 दिसंबर को दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरने के बाद मिशन एक सटीक समय-सारिणी का पालन करेगा। प्रक्षेपण के लगभग 942 सेकंड यानी करीब 15 मिनट के भीतर ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट रॉकेट से अलग होकर अपनी निर्धारित कक्षा की ओर बढ़ जाएगा। इसे पृथ्वी से लगभग 520 किलोमीटर ऊपर 53 डिग्री झुकाव वाली गोलाकार कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

भारत की अंतरिक्ष साख को मिलेगी नई ऊंचाई
न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुआ यह समझौता वैश्विक कमर्शियल स्पेस मार्केट में भारत की बढ़ती साख को दर्शाता है। यह मिशन न केवल इसरो को एक भरोसेमंद लॉन्च पार्टनर के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि भविष्य की पूरी तरह कनेक्टेड दुनिया की नींव भी रखेगा।

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