हम रोज़ खाना बनाते हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि जिस बर्तन में भोजन पकाया या परोसा जाता है, वही उसके स्वाद, पोषण और शरीर पर असर को तय करता है। आयुर्वेद के अनुसार धातु शरीर में दवा जैसा असर डाल सकती है। इसलिए सही बर्तन का चयन उतना ही ज़रूरी है, जितना पौष्टिक सामग्री का उपयोग।
पीतल : पाचन बेहतर, पोषण अधिक
पीतल के बर्तन भोजन को जल्दी पचने योग्य बनाते हैं और शरीर में पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद करते हैं। पुराने समय में दाल और कढ़ी का स्वाद और पौष्टिकता इसी वजह से अधिक होती थी।
कांसा : इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक
कांसा ऐसा धातु माना गया है जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसमें परोसा गया भोजन जल्दी खराब नहीं होता और यह त्रिदोष संतुलन में भी प्रभावी माना जाता है। इसमें खाने से पाचन शक्ति मजबूत होने के प्रमाण भी मिले हैं।
मिट्टी के बर्तन : विटामिन सुरक्षित, खाना सुपाच्य
मिट्टी के बर्तन धीमी आंच पर पकाने के कारण
✔ भोजन के विटामिन-खनिज सुरक्षित रहते हैं
✔ खाना हल्का और सुपाच्य बनता है
✔ मटके या मिट्टी के बर्तन में जमाया दही अधिक प्रोबायोटिक गुण वाला होता है
दाल, खिचड़ी और बिरयानी के लिए मिट्टी के पात्र बेहतरीन विकल्प हैं।
लोहे के बर्तन : आयरन की कमी दूर
लोहे की कड़ाही में पकाने पर भोजन में आयरन स्वाभाविक रूप से घुलता है।
विशेष रूप से एनीमिया से जूझ रही महिलाओं के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।
तांबा : प्राकृतिक जल शोधन
तांबे के पात्र में रखा पानी
✔ जीवाणुओं को नष्ट करता है
✔ लीवर की सफाई में सहायक
✔ पाचन तंत्र को मजबूत करता है
कांसे के बर्तनों में रखा पानी भी दूषित तत्वों को काफी हद तक समाप्त कर देता है।
इन धातुओं से सावधान रहें
एल्युमिनियम
नॉन-स्टिक कोटिंग वाले बर्तन
निम्न गुणवत्ता वाले स्टील
इनका अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है।
यदि हम रोज़मर्रा की रसोई में थोड़ा बदलाव कर लें—पीतल, कांसा, लोहे और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग बढ़ाएं—तो हमारा भोजन ही शरीर की दवा बन सकता है। स्वास्थ्य की शुरुआत हमारे किचन से होती है, बस बर्तनों का चुनाव समझदारी से करना होगा।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें
