- रिपोर्ट:मनोज यादव
एटा। यादव समाज के सपा कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराज़गी अब खुलकर सामने आने लगी है। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान जो सांसद जनता और कार्यकर्ताओं के बीच हर समय उपलब्ध रहते थे, वही अब साधारण फोन कॉल तक उठाना जरूरी नहीं समझ रहे हैं। यह शिकायत एटा के माननीय सांसद देवेश शाक्य के खिलाफ बड़े स्तर पर उठ रही है।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि चुनाव के कठिन दिनों में उन्होंने तन-मन-धन लगाकर सांसद को जनता का भरोसा दिलाया। गांव-गांव जाकर विकास के नाम पर समर्थन जुटाया। मगर आज जब जनता उन्हीं कार्यकर्ताओं से सवाल पूछ रही है —
“विकास कहाँ है?”
तो वे खुद भी जवाबहीन खड़े दिखाई देते हैं, क्योंकि सांसद जी अब संवाद से दूरी बनाए हुए हैं।
संवादहीनता पर सवाल
राजनीति की मूल आत्मा संवाद मानी जाती है। और संवाद की शुरुआत “सुनने” से होती है। ऐसे में यदि एक लोकसभा सांसद अपने ही कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुन पा रहा है, तो आम नागरिकों की समस्याओं तक कैसे पहुँचेगा? कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह रवैया संगठनात्मक मर्यादाओं का अपमान है और जनभावनाओं की अनदेखी भी।
कार्यकर्ताओं की पीड़ा
सपा कार्यकर्ताओं का स्पष्ट आरोप है कि—
सांसद जी से संपर्क करना अब लगभग असंभव हो गया है
कॉल करने पर फोन “खामोश” मिलता है
उनके द्वारा किए गए वादों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही
उनके अनुसार यह सिर्फ व्यक्तिगत उपेक्षा नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संगठन की विश्वसनीयता पर गहरा प्रश्नचिह्न है।
यह चेतावनी है, शिकायत नहीं
कार्यकर्ताओं का कहना है कि
चुनाव के बाद सांसद का फोन व्यस्त मिलना समझ आता है, परंतु पूरी तरह खामोश होना लोकतंत्र के लिए अशुभ संकेत है।
वे दावा करते हैं कि यदि सांसद जी तत्काल संवाद बहाल नहीं करते, तो यह परिस्थिति भविष्य की राजनीति पर गंभीर असर डाल सकती है और पार्टी के जनाधार को कमजोर कर सकती है।
जनतंत्र में जनता ही शक्ति का स्रोत है और जनता तक पहुँचने का सेतु कार्यकर्ता।
यदि वही सेतु टूटने लगे, तो राजनीतिक इमारत कब तक संभल पाएगी?
