भगवान की मूर्ति टूटना अशुभ नहीं, भ्रम दूर करते हैं प्रेमानंद जी महाराज—जानें क्या करना होता है जरूरी
नई दिल्ली। अक्सर घर में भगवान की मूर्ति टूट जाने पर लोग घबरा जाते हैं और इसे किसी अनहोनी या अमंगल का संकेत मान लेते हैं। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और मूर्ति स्थापना का विशेष महत्व होने की वजह से मन में भय और आशंका स्वाभाविक है। लेकिन प्रेमानंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में इस भ्रम को पूरी तरह दूर कर दिया है।
मूर्ति टूटना अमंगल नहीं—प्रेमानंद जी महाराज
एक भक्त द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में प्रेमानंद जी महाराज ने स्पष्ट कहा कि भगवान की मूर्ति टूटना किसी भी प्रकार से अशुभ नहीं होता। उन्होंने बताया कि मूर्तियां पत्थर, धातु या मिट्टी जैसे नाशवान पदार्थों से बनी होती हैं, इसलिए इनका टूटना स्वाभाविक है और इससे डरने की आवश्यकता नहीं है।
व्यर्थ डरें नहीं, भावनाएं महत्वपूर्ण हैं
महाराज जी ने कहा कि पूजा का वास्तविक आधार मूर्ति नहीं, बल्कि भक्त की भावना है। भगवान अविनाशी हैं—वे मूर्ति के टूटने से कहीं नहीं जाते। इसलिए मूर्ति के टूटने को लेकर हताशा या भय बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
खंडित मूर्ति के लिए क्या करें?
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार यदि घर की कोई मूर्ति टूट जाए तो उसे सम्मानपूर्वक किसी पवित्र नदी जैसे गंगा या यमुना के तट पर स्थापित कर देना चाहिए। यह धार्मिक परंपराओं के अनुरूप सही तरीका माना गया है।
महाराज जी का संदेश—भक्ति में स्थिर रहें
उन्होंने कहा कि भगवान मूर्ति में नहीं, बल्कि भाव और श्रद्धा में बसे होते हैं। इसलिए मूर्ति के खंडित होने पर चिंता करने की बजाय भगवान के प्रति समर्पण और भक्ति को मजबूत रखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित है। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित धार्मिक विद्वान या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
