माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और भरण-पोषण पर जागरूकता शिविर आयोजित

बदायूं। माननीय उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ तथा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बदायूं के दिशा-निर्देश पर संविलय विद्यालय कोल्हाई में “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007” के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में पीएलवी भगवान सिंह एवं अज़रा परवीन ने स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान प्रत्येक बच्चे का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि भरण-पोषण अधिनियम, 2007 के तहत बच्चों पर यह कानूनी ज़िम्मेदारी भी है कि वे अपने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं का ध्यान रखें। वक्ताओं ने कहा कि वृद्धावस्था जीवन का महत्वपूर्ण चरण है और इसमें माता-पिता को सबसे अधिक अपने बच्चों के सहयोग और स्नेह की आवश्यकता होती है।
साथ ही बच्चों को निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर, ज़रूरतमंद या विशेष परिस्थितियों में रहने वाले व्यक्तियों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिसका लाभ बच्चे स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों के लिए ले सकते हैं।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाध्यापक पंकज माहेश्वरी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की पहचान है। बच्चों को हमेशा अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए और उन्हें कभी भी अकेला महसूस नहीं होने देना चाहिए।
वहीं सहायक अध्यापक प्रियंका परिहार ने कहा कि छोटे बच्चे तो स्वाभाविक रूप से अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, परंतु जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, यह जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा और देखभाल के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
कार्यक्रम में सहायक अध्यापक तरन्नुम, बंटी देवी, कुसुमा देवी, कमल बहादुर सहित अन्य स्टाफ सदस्य भी उपस्थित रहे और उन्होंने शिविर को सफल बनाने में सहयोग किया।
अंत में बच्चों को यह संकल्प दिलाया गया कि वे सदैव अपने माता-पिता एवं बुजुर्गों का सम्मान करेंगे और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने में सहयोग करेंगे।

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