नई दिल्ली।दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण ब्लास्ट को 27 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी जांच एजेंसी या दिल्ली पुलिस की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। इस पर अब देशभर में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जब राजधानी के दिल में इतना बड़ा विस्फोट हो गया, तब भी एजेंसियां मौन क्यों हैं।
लोगों का कहना है कि देश की जांच एजेंसियां पूरी तरह से फेल साबित हुई हैं। ऐसा लगता है जैसे एजेंसियों के अधिकारी “पर्ची से मिली बड़ी कुर्सियों” पर बैठे हों। घटनास्थल पर कार्रवाई के बजाय सिर्फ बयानबाज़ी और औपचारिक जांच तक सीमित रह गई हैं सुरक्षा व्यवस्थाएँ।
दिल्ली पुलिस और फरीदाबाद पुलिस पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, फरीदाबाद पुलिस भी इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। कहा जा रहा है कि जिस आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश फरीदाबाद में हुआ, उसी ने दिल्ली धमाके की पटकथा लिखी थी।
छापेमारी के दौरान एजेंसियों को कई अहम सबूत मिले, जिससे नेटवर्क की पोल खुल गई। लेकिन इसके बाद जल्दबाजी में कुछ संदिग्ध दिल्ली की ओर भाग निकले और खुद को चौतरफा घिरा देख घबराहट में आत्मघाती कदम उठा लिया।
पहली बार डॉक्टर निकले आतंकी
यह भी सामने आया है कि देश में पहली बार पकड़े गए सभी आतंकी डॉक्टर निकले हैं — यानी शिक्षित वर्ग अब आतंकी साजिशों में शामिल हो रहा है।
फरीदाबाद के अल फलह यूनिवर्सिटी से शुरू हुई साजिश ने अब देश की सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी और सतर्कता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
जांच एजेंसियों की “पोस्ट-एक्शन” पॉलिसी पर सवाल
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एजेंसियां हर बार घटना के बाद “पोस्ट-एक्शन मोड” में आ जाती हैं —
“सांप भाग गया, लकीर पीट रहे हैं जांच एजेंसियां।”
