बेटी ही लक्ष्मी — बिना दान-दहेज की हुई शादी बनी समाज के लिए मिसाल

  • रिपोर्ट: एमपी भार्गव

ऐलनाबाद;दहेज की बढ़ती कुप्रथा और खर्चीली शादियों के दौर में गांव मिठनपुरा में हुई एक सादगीपूर्ण शादी समाज के लिए मिसाल बन गई है। गांव के साधारण किसान श्री हरी सिंह भांभू ने अपने बेटे डॉ. आकाशदीप की शादी बिना दान-दहेज के संपन्न करवाई।

इस विवाह की खास बात यह रही कि श्री हरी सिंह ने न तो एक रुपये का लेनदेन किया और न ही किसी प्रकार का उपहार या दहेज स्वीकार किया। उनकी पुत्रवधू डॉ. नवोदिता कड़वासरा का गृहप्रवेश ‘लक्ष्मी के रूप में’ कराते हुए उन्होंने समाज में फैली दहेज प्रथा के खिलाफ एक सशक्त संदेश दिया।

श्री भांभू ने कहा, “यदि समाज बेटियों की शिक्षा पर किए गए खर्च को ही दहेज माने, तो बेटियां बोझ नहीं बल्कि आशीर्वाद बनेंगी। एक शिक्षित बेटी दो परिवारों को शिक्षित करती है।”

शादी समारोह में वर पक्ष ने यह स्पष्ट किया कि “शिक्षा और नैतिक संस्कार ही परिवार की असली संपत्ति हैं, न कि दिखावे के लिए लिया जाने वाला दहेज।”

समारोह में मौजूद लोगों ने इस अनोखी पहल की खुलकर सराहना की। उनका कहना था कि ऐसे प्रयास समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

About The Author

Leave A Reply

Your email address will not be published.