बिहार चुनावों के बाद मोदी का ध्यान हरियाणा पर केन्द्रित होने की संभावना है, जो वास्तविक और वैधानिक नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण

बिहार चुनाव के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान हरियाणा की ओर मनोहर लाल की सक्रियता से मुख्यमंत्री नायब सैनी असहज स्थिति में

गुस्ताख़ी माफ़, हरियाणा – पवन कुमार बंसल

 बिहार विधानसभा चुनावों के संपन्न होते ही अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान हरियाणा की ओर मुड़ने की संभावना है। खासकर राज्य में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की भूमिका को लेकर पार्टी नेतृत्व गंभीर है। हाल ही में एडीजीपी वाई. पुरन कुमार की आत्महत्या ने हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सैनी की छवि पर गहरा असर डाला है। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी को राज्य का प्रस्तावित दौरा तक रद्द करना पड़ा।
हरियाणा आज “दे-फैक्टो” और “दे-ज्यूर” नेतृत्व का उदाहरण बन गया है। संवैधानिक रूप से नायब सैनी मुख्यमंत्री हैं, लेकिन व्यवहारिक रूप से सत्ता संचालन में अभी भी मनोहर लाल का प्रभाव हावी दिखाई देता है। प्रदेश के अधिकारी निर्देश लेने के लिए उन्हीं के पास जाते हैं, और कारोबारी भी काम निकलवाने के लिए उन्हीं के दरवाजे खटखटाते हैं।
करनाल से सांसद होने के नाते मनोहर लाल को अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा करने का अधिकार है, परंतु अब वे एक केंद्रीय मंत्री हैं — और उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे राष्ट्रीय दायित्वों पर अधिक ध्यान दें।
वाई. पुरन कुमार आत्महत्या प्रकरण ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को असहज स्थिति में डाल दिया है। इस मामले में मनोहर लाल का पीजीआई रोहतक पहुंचकर मृतक एएसआई संदीप कुमार के परिवार से मिलना और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की घोषणा करना मुख्यमंत्री के विशेषाधिकार में हस्तक्षेप माना जा रहा है। यह कदम प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से विवादास्पद साबित हुआ है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मनोहर लाल कभी प्रधानमंत्री मोदी के अत्यंत विश्वासपात्र माने जाते थे। यह संबंध उस समय से है जब मोदी हरियाणा के प्रभारी थे और मनोहर लाल संगठन मंत्री। परंतु अब यह धारणा बन रही है कि हरियाणा में मनोहर लाल पार्टी के लिए बोझ बन चुके हैं। इसी वजह से उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाकर नायब सैनी को अवसर दिया गया था।
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी को खुफिया एजेंसियों और अपने निजी स्रोतों से यह फीडबैक मिल रहा है कि मनोहर लाल मुख्यमंत्री नायब सैनी को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री मोदी हरियाणा की राजनीति में बड़ा निर्णय ले सकते हैं, ताकि संगठन और सरकार के बीच समन्वय स्थापित किया जा सके।
(लेखक: पवन कुमार बंसल, वरिष्ठ पत्रकार, हरियाणा)

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