पुस्तक समीक्षा : “ज़हर जो हमने पिया – महिला सफाई कर्मियों की आपबीती”

गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा — पवन कुमार बंसल
पुस्तक समीक्षा : “ज़हर जो हमने पिया – महिला सफाई कर्मियों की आपबीती”
संपादन : अशोक कुमार गर्ग (IAS), मनोज छाबड़ा और राजकुमार जांगड़ा
प्रकाशक : शीघ्र प्रकाशन

हरियाणा समाज की जमीनी हकीकत और सामाजिक असमानता को उजागर करती यह पुस्तक — “ज़हर जो हमने पिया” — केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि उन आवाज़ों का सशक्त प्रतिनिधित्व है जिन्हें अब तक समाज ने अनसुना किया। पुस्तक का संपादन तीन संवेदनशील और अनुभवी व्यक्तित्वों — अशोक कुमार गर्ग (IAS), मनोज छाबड़ा, और राजकुमार जांगड़ा — द्वारा किया गया है।

इस कृति में महिला सफाई कर्मियों की आपबीती के माध्यम से यह दिखाया गया है कि सफाई व्यवस्था के सबसे निचले पायदान पर कार्यरत महिलाएँ किस प्रकार सामाजिक भेदभाव, आर्थिक शोषण और मानसिक उत्पीड़न का सामना करती हैं। “ज़हर जो हमने पिया” शीर्षक स्वयं इस वेदना की गहराई को प्रकट करता है — यह ज़हर केवल नालियों और कचरे का नहीं, बल्कि असमानता, उपेक्षा और अपमान का है जिसे ये महिलाएँ हर दिन निगलने को विवश हैं।

संपादकों ने पुस्तक में वास्तविक जीवन की कहानियों, संवादों और साक्षात्कारों को बड़ी ईमानदारी से पिरोया है। लेखन शैली सरल लेकिन प्रभावशाली है, जो पाठक के मन में गहरी छाप छोड़ती है। प्रशासनिक दृष्टिकोण और मानवीय संवेदना का यह अद्भुत संगम इस पुस्तक को विशेष बनाता है।

पुस्तक यह प्रश्न भी उठाती है — क्या स्वच्छता अभियान तभी सफल होगा जब सफाई कर्मियों को सम्मान और सुरक्षा मिलेगी? क्या विकास केवल भवनों तक सीमित रहेगा या उन हाथों तक पहुँचेगा जो समाज को स्वच्छ रखते हैं?

संक्षेप में, “ज़हर जो हमने पिया” सामाजिक न्याय, श्रम गरिमा और महिला सशक्तिकरण पर गहन विमर्श प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक नीति-निर्माताओं, समाजशास्त्रियों, पत्रकारों और आम पाठकों—सभी के लिए एक आईना है।

यह कृति न केवल पढ़ने योग्य है, बल्कि महसूस करने योग्य है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.