रामपुर। इस वर्ष रामलीला मैदान में आयोजित मेले और शोभायात्राओं की सबसे खास विशेषता रही दूसरे गेट का निर्माण। जिला प्रशासन द्वारा की गई इस व्यवस्था ने न केवल भीड़ प्रबंधन को आसान बना दिया, बल्कि श्रद्धालुओं और दुकानदारों दोनों को बेहतरीन सुविधा भी प्रदान की।
पहली बार ऐसा हुआ कि शोभायात्रा पहले गेट से प्रवेश कर दूसरे गेट से बाहर निकलती रही, जिससे मैदान में आवागमन बिल्कुल व्यवस्थित बना रहा। मेले में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करना जहां पहले एक चुनौती हुआ करता था, वहीं इस बार सब कुछ सुचारू और सहज दिखाई दिया।
रामलीला कमेटी ने भी इस कदम की जमकर सराहना की। महामंत्री वीरेंद्र गर्ग ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि
हमारी यह मांग वर्षों पुरानी थी। आखिरकार प्रशासन ने इसे पूरा किया। अब मैदान में आने-जाने की परेशानी खत्म हो गई और श्रद्धालु निश्चिंत होकर उत्सव का आनंद ले सके।
मेले में आए लोगों ने भी प्रशासन को धन्यवाद दिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि जहां पहले बच्चों और परिवार के साथ मेले में घूमना थोड़ा कठिन होता था, वहीं इस बार व्यवस्थाएं इतनी सरल रहीं कि लोग आसानी से घूमते, खरीदारी करते और कार्यक्रमों का आनंद लेते दिखे।
यह बदलाव सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यवस्था सुधार का एक शानदार उदाहरण भी बन गया। प्रशासन की इस नई पहल ने सुरक्षा और सुविधा दोनों को नए आयाम दिए।
सच कहा जाए तो इस बार रामपुर की रामलीला मैदान केवल धार्मिक आयोजन का केंद्र ही नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित भीड़ प्रबंधन का आदर्श मॉडल भी बनकर उभरा।
