नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इन दिनों कन्या पूजन के साथ मां दुर्गा को हलवा और काले चने का भोग अर्पित किया जाता है। कन्या भोजन के बाद व्रत का पारण किया जाता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर मां दुर्गा को हलवा और चने का ही भोग क्यों लगाया जाता है, जबकि खीर या अन्य मिठाइयों का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता? इसके उत्तर पुराणों में विस्तार से दिए गए हैं।
मां दुर्गा को प्रिय है काला चना
देवीभागवत और स्कंद पुराण के अनुसार, मां दुर्गा को चना अत्यंत प्रिय है। चना शुद्ध और पौष्टिक अनाज माना जाता है। मान्यता है कि अष्टमी और नवमी के दिन यदि मां को काले चने का भोग अर्पित किया जाए तो भक्तों को शक्ति और ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके साथ ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
हलवे का महत्व
मार्कण्डेय पुराण में हलवे को मां दुर्गा का प्रिय भोग बताया गया है। हलवा सुख-समृद्धि, संतोष और आनंद का प्रतीक माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के विशेष दिनों पर मां दुर्गा की आराधना करते समय हलवा और चने का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में शांति, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
इस प्रकार नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर हलवा-चने का भोग सिर्फ परंपरा ही नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।
