- रिपोर्ट- मनोज यादव
एटा :- “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” — यह सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि समाज की नींव को मजबूत करने वाला एक क्रांतिकारी संदेश है। जीजीआईसी एटा में आयोजित स्वास्थ्य शिविर इसी सोच को धरातल पर उतारने का साहसिक प्रयास है। एटा नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सुधा गुप्ता का महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का आह्वान काबिले-तारीफ है। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की मौजूदगी ने यह साबित किया कि अब स्वास्थ्य सेवाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत में भी आमजन तक पहुँचाने का प्रयास हो रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर आज तक महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर इतनी उदासीनता क्यों बरती गई? क्यों हमारे गांवों और कस्बों की महिलाएं एनीमिया, कुपोषण और प्रसव संबंधी जटिलताओं से जूझती रहीं? क्यों मातृ मृत्यु दर और कुपोषण के आंकड़े हमें बार-बार शर्मसार करते रहे?
सच यह है कि जब तक नारी स्वस्थ नहीं होगी, तब तक परिवार, समाज और राष्ट्र सशक्त नहीं हो सकता। आज की यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाने वाली चेतावनी भी है। सरकारों ने अरबों-खरबों के बजट तो बनाए, योजनाओं के ढेर लगा दिए, लेकिन असलियत यह है कि ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं अब भी नाकाफी हैं।
यह शिविर जागरूकता की अलख जरूर जगाता है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या यह केवल एक दिन का दिखावटी आयोजन होगा या फिर इसे निरंतर जनआंदोलन बनाया जाएगा? महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार की गारंटी और चिकित्सा सुविधाओं की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
अगर “स्वस्थ नारी” का सपना सच करना है, तो ऐसे शिविरों को हर गांव, हर मोहल्ले तक ले जाना होगा। वरना नारे तो बहुत गढ़े जाएंगे, पोस्टर भी खूब छपेंगे, लेकिन नारी के माथे पर स्वास्थ्य की लाली नहीं, बीमारी की पीड़ा ही छाई रहेगी।
