मोदीनगर, 29 सितम्बर 2025। आज सेवा पखवाड़े अभियान (17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलने वाला) के अंतर्गत फाइन आर्ट महाविद्यालय में भव्य चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता की सूचना मिलते ही अनेक कला-प्रेमी भी आयोजन स्थल पर पहुँचे। वास्तव में कई लोगों के लिए यह अवसर लंबे समय से संजोई गई आकांक्षा की पूर्ति जैसा था।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाओं और अंतर्मन के भावों को रंगों के माध्यम से कागज और बोर्ड पर उतारते हुए अद्भुत कलाकृतियों का सृजन किया। किसी ने प्राकृतिक दृश्यों को उकेरा तो किसी ने मानवीय आकृतियों और भावनाओं को जीवंत किया। कला को ईश्वरीय उपहार मानते हुए प्रतिभागियों ने अपनी रचनाओं में छल-कपट रहित, भावनाओं से परिपूर्ण एक नई दुनिया रची।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन और रोचक प्रसंग
निर्णायकों के लिए कलाकृतियों का मूल्यांकन करना अत्यंत कठिन रहा क्योंकि प्रत्येक चित्र अपने आप में अनुपम और अद्वितीय था। इसी क्रम में एक दिलचस्प किस्सा भी याद किया गया कि एक बार पुष्पों की चित्रकला का निर्णय तब हुआ जब एक असली तितली लाई गई और उसने एक विशेष चित्र पर बैठकर विजेता का चयन कर दिया।
कला का महत्व और सजीवता
कला केवल कागज पर बने रंग नहीं, बल्कि यह आत्मा की अभिव्यक्ति है। कलाकार अपने ब्रह्मांड की अदृश्य प्रेरणाओं को अपने रंगों और कूची के माध्यम से उतारता है। चित्रकला में छल-कपट नहीं, केवल सच्चाई और कल्पनाओं का संसार होता है। यही कारण है कि कलाकार का चरित्र अक्सर झूठे दिखावे से परे और सपनों की दुनिया में खोया हुआ माना जाता है।
प्रदर्शित कलाकृतियाँ
प्रतियोगिता में पारंपरिक और आधुनिक दोनों ही प्रकार की कलाकृतियों को स्थान मिला। प्राकृतिक दृश्यों, गांधी जी की प्रतिमाओं, मानव आकृतियों से लेकर गुप्त संदेश वाली विशेष कलाकृति भी प्रदर्शित की गई, जिसे प्रकाश में पढ़ा जा सकता था। दर्शकों के लिए यह अनुभव अत्यंत अद्भुत और प्रेरणादायक रहा।
कला और व्यक्तिगत अनुभव
इस अवसर पर कई प्रतिभागियों और दर्शकों ने अपनी कला-यात्रा को भी साझा किया। किसी ने बताया कि विद्यालय के दिनों में गांधी शताब्दी पर उन्होंने असंख्य गांधी चित्र बनाए थे, तो किसी ने बताया कि प्राकृतिक दृश्य उकेरने में पूरा विज्ञान भी काम करता है। कई परिवारों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए कि कैसे उनके घर में चित्रकला एक परंपरा और शौक के रूप में पीढ़ियों से चली आ रही है।
आयोजकों का संदेश
डॉ. अनिला सिंह आर्य ने कहा कि चित्रकला केवल शौक नहीं, बल्कि यह जीवन को सुंदर बनाने का माध्यम है। कलाकार अपनी कल्पनाओं के आधार पर एक नई दुनिया का सृजन करता है और समाज का दायित्व है कि वह इस खूबसूरत रचना को सहयोग और प्रोत्साहन दे।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय प्रशासन ने सभी प्रतिभागियों, निर्णायकों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। संगठन की ओर से भी सभी को धन्यवाद दिया गया कि सेवा पखवाड़े अभियान के अंतर्गत कला के इस उत्सव ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि कला केवल अभिव्यक्ति ही नहीं, बल्कि समाज और जीवन को रंगों से भर देने का सशक्त माध्यम है।
