मिग-21 की शानदार विदाई : इतिहास का सुनहरा पन्ना

  • रिपोर्ट- मनोज यादव

भारतीय वायुसेना का गौरव, आकाश का शेर और दुश्मनों का खौफ—मिग-21 अब विदाई ले चुका है। यह महज एक लड़ाकू विमान नहीं था, बल्कि यह राष्ट्र की शान, साहस और पराक्रम का प्रतीक था। जब-जब भारत की सीमाओं पर संकट आया, मिग-21 ने गर्जन के साथ उड़ान भरकर दुश्मन को धूल चटाई। 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल तक, इसकी दहाड़ ने पाकिस्तान के होश उड़ा दिए।
आज विदाई के इस क्षण में आंखें नम हैं, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा है। जिस मिग-21 को कभी “टाइगर” कहा जाता था, वह असंख्य भारतीय पायलटों की बहादुरी का साथी रहा।

इसकी उड़ानें सिर्फ आसमान नहीं नापती थीं, बल्कि दुश्मन के हौसलों को चकनाचूर कर देती थीं। हां, इसे “फ्लाइंग कॉफिन” भी कहा गया, लेकिन सच तो यह है कि इसकी धार आज भी कई नए विमानों से कम नहीं थी। यह मशीन नहीं, भारत का रणबांकुरा था।
आज जब आधुनिक सुखोई, राफेल और तेजस आकाश की सुरक्षा संभाल चुके हैं, तब मिग-21 को विदा देना हमारी सैन्य परंपरा में नए युग की शुरुआत है। लेकिन याद रहे—मिग-21 महज रिटायर हुआ है, उसकी गूंज हमेशा भारतीय आकाश में रहेगी। उसकी हर उड़ान भारत की बहादुरी का गीत है और उसका हर गर्जन देशभक्ति की गर्वित पुकार।

मिग-21 को सलाम! यह विदाई नहीं, बल्कि भारत के वीर इतिहास को नमन है।

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