केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिसमूह की 5वीं बैठक, विद्युत वितरण कंपनियों की वित्तीय व्यवहार्यता सुधारने पर जोर

नई दिल्ली। केंद्रीय विद्युत और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री श्री मनोहर लाल ने नई दिल्ली में विद्युत वितरण उपक्रमों (DISCOMs) की व्यवहार्यता से संबंधित मुद्दों पर गठित मंत्रिसमूह की 5वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कई राज्यों के ऊर्जा मंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण तथा पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में केंद्रीय विद्युत एवं नवीन और अक्षय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक, उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री भी उपस्थित रहे।

नई सुधार आधारित योजना पर विचार

बैठक में केंद्र सरकार द्वारा विद्युत वितरण उपक्रमों के ऋण पुनर्गठन के लिए नई सुधार-आधारित योजना पर चर्चा हुई। इसमें यह सहमति बनी कि वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए नियामक आयोगों को पूर्ण लागत आधारित और समय पर शुल्क आदेश जारी करने होंगे। साथ ही, वितरण कंपनियों की देनदारियों को अंतिम रूप से राज्य सरकार की देनदारी माना जाएगा।

मंत्री मनोहर लाल ने दिया संदेश

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देशवासियों को गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करना अनिवार्य है। उन्होंने सभी सरकारी प्रतिष्ठानों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर शीघ्र लगाने और “सभी के लिए, हर समय बिजली” की प्रतिबद्धता को दोहराने पर जोर दिया।

बैठक के प्रमुख बिंदु

राज्य सरकारों को सब्सिडी और विभागीय बकाया राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना होगा।

स्मार्ट मीटरिंग कार्यों में तेजी और पावर खरीद अनुकूलन के लिए डेटा एनालिटिक्स का उपयोग बढ़ाने पर बल दिया गया।

प्रेरित मुकदमों को रोकने के लिए मध्यस्थता तंत्र को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर विचार हुआ।

विद्युत (संशोधन) विधेयक के प्रावधानों को साझा किया गया, जिससे ऊर्जा संक्रमण और वितरण नेटवर्क की दक्षता बढ़ेगी।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि वितरण क्षेत्र में सुधार अपरिवर्तनीय होने चाहिए ताकि भविष्य में ऋण जाल की समस्या फिर से न पैदा हो।

 

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