Mirzapur: दरोगा के शव को एम्बुलेंस भी नसीब नहीं हुई, रिक्शे में लाश को ले जाया गया

मिर्जापुर। जिले के चील्ह थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर अनिल कुमार ओझा ने अपने निजी कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार, वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कुछ दिन पहले ही उन्होंने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के लिए आवेदन किया था। हालांकि पारिवारिक दबाव के कारण उन्हें यह आवेदन वापस लेना पड़ा।

इस दुखद घटना ने न केवल मानवता को शर्मसार किया, बल्कि पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता को भी उजागर कर दिया। सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि जिस दरोगा ने सालों तक अपनी सेवाएं दीं, उनके शव को ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक की व्यवस्था नहीं की गई।

थाने के इंचार्ज ने चारपहिया वाहन उपलब्ध कराने की भी जहमत नहीं उठाई। नतीजतन, अनिल कुमार ओझा का शव एक ऑटो रिक्शे में लटकाते हुए ले जाया गया। यह नजारा देखकर स्थानीय लोग भी आक्रोशित हो उठे।

लोगों का कहना है कि यह घटना पुलिस व्यवस्था की घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता को दर्शाती है। सवाल यह उठता है कि जब एक पुलिस अधिकारी को सम्मानजनक विदाई तक नहीं दी जा रही, तो आम जनता के साथ कैसा व्यवहार किया जाता होगा?

इस घटना ने समाज और प्रशासन दोनों के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर हमारे सिस्टम में एक कर्मठ पुलिसकर्मी के प्रति इतनी भी संवेदनशीलता क्यों नहीं बची?

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