युवाओं के आदर्श ही बना रहे हैं उन्हें बर्बादी का शिकार

  • रिपोर्ट – मनोज कुमार यादव

आज के दौर में हमारे देश के युवा अपने जीवन के आदर्श के रूप में खिलाड़ियों और अभिनेताओं को देखते हैं। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि खिलाड़ी मेहनत, संघर्ष और अनुशासन से अपने खेल में ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं और अभिनेता अपनी कला से लोगों का दिल जीतते हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि वही लोग, जिन्हें युवा प्रेरणा का स्रोत मानते हैं, आज विज्ञापनों के जरिए उन्हें ऐसे रास्तों पर ले जा रहे हैं जो उनके जीवन को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में देश में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाज़ी का बाजार तेज़ी से बढ़ा है। इन कंपनियों को अपने प्रचार के लिए बड़े खिलाड़ियों और लोकप्रिय अभिनेताओं का चेहरा चाहिए होता है, ताकि लोग आसानी से इनसे जुड़ जाएं। क्रिकेट, फिल्म, और अन्य मनोरंजन जगत के सितारे मोटी रकम लेकर ऐसे विज्ञापनों में काम करते हैं, जो युवाओं को यह संदेश देते हैं कि ऑनलाइन गेम्स और सट्टा खेलना मजेदार, रोमांचक और पैसा कमाने का आसान तरीका है।

लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है। यह सिर्फ एक जाल है, जिसमें फंसकर लाखों युवा अपनी पढ़ाई, करियर, और परिवार की आर्थिक स्थिति तक बर्बाद कर रहे हैं। कुछ मामलों में तो यह लत मानसिक तनाव, अवसाद, और आत्महत्या तक की नौबत ला रही है।

जब कोई युवा अपने पसंदीदा क्रिकेटर या अभिनेता को किसी ऐप या वेबसाइट का प्रचार करते देखता है, तो उसे लगता है कि यह सुरक्षित और लाभदायक है। वह बिना सोचे-समझे उसमें पैसा लगाना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे यह शौक लत में बदल जाता है, और फिर वह उधार, चोरी या गलत रास्तों पर जाने को मजबूर हो सकता है।

खिलाड़ियों और अभिनेताओं को समझना होगा कि उनका हर शब्द और हर कदम करोड़ों युवाओं को प्रभावित करता है। सिर्फ पैसों के लिए ऐसे विज्ञापनों में काम करना, जहां लोगों की जिंदगी बर्बाद होने का खतरा है, न सिर्फ नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह उनके आदर्श होने की छवि पर भी दाग लगाता है।

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