बिहार ललित कला अकादमी, पटना में आयोजित 2 अगस्त से तीन दिवसीय लोक चित्रकला प्रदर्शनी में मृणाल सिंह की प्रयोगत्मात चित्रकथा ने मुख्य चर्चा बटोरी। इनकी चित्रकला शैली विशिष्ट और महीन कचनी होने के कारण, इन्हें अन्य कलाकारों से अलग पहचान देती है।
इनका विषय “पिया मोर बालक, हम तरुणी…” नामक गीत था, जिसे उन्होंने कागज़ पर चित्रांकित किया। यह गीत कवि कोकिल विद्यापति द्वारा रचित, मैथिल समाज क एक लोकप्रिय गीत है। महाकवि के इस वियोग प्रधान गीत में व्यथित युवती की अपने पति के स्नेह को पाने की व्याकुलता को दर्शाया गया है। इस कथाचित्र में, गीत की तरुणी नायिका को अहम् रूप से चित्रित करते हुए, गीत की प्रमुख पात्रों जैसे ‘बटोहिया’, ‘हाट के लोग’, ‘धेनु गाय’ आदि को भी चित्रांकित किया गया, जो जीवंत अनुभव देता है।
कलाकार ने विषय का विशेष अध्ययन करते हुए, कथित कथाचित्र को भावनापूर्ण रूपरेखा दी है। उनकी व्याख्यान की शैली और चित्रकला को संगीत एवं परंपरा से जोड़ने के ढंग को प्रचुर सराहना मिली।
प्रदर्शनी के मुख्य अतिथि श्री अशोक कुमार सिन्हा, अपर निदेशक (बिहार संग्रहालय) ने कलाकार की खूब प्रशंसा की। यहाँ आये हुए राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कृत कलाकारों ने भी मृणाल को विशेष रूप से बधाईयां दीं।
