“शहीद उधम सिंह के 85वें बलिदान दिवस पर सिरसा में आयोजित होगी श्रद्धांजलि सभा – 31 जुलाई को युवक साहित्य सदन में जनसभा”
सिरसा/ऐलनाबाद, 24 जुलाई (डॉ. एम. पी. भार्गव की विशेष रिपोर्ट)। भारत मां के वीर सपूत और महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह की शहादत को याद करते हुए 31 जुलाई को उनके 85वें बलिदान दिवस के अवसर पर सिरसा में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा। यह सभा सुबह 11 बजे युवक साहित्य सदन, जनता भवन रोड सिरसा में आयोजित होगी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए शहीद यादगार समिति सिरसा के संयोजक मेहर सिंह बांगड़ ने प्रेस को बताया कि यह आयोजन उधम सिंह के बलिदान, साहस और राष्ट्रप्रेम को श्रद्धांजलि देने हेतु किया जा रहा है।
शहीद उधम सिंह: संघर्ष और बलिदान की मिसाल
बांगड़ ने बताया कि उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के सुनाम गांव में हुआ था। बचपन में ही माता-पिता और बड़े भाई को खोने वाले उधम सिंह ने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा ग्रहण की और आज़ादी के लिए संघर्ष का रास्ता चुना।
13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उधम सिंह के जीवन की दिशा तय कर दी। उन्होंने इस हत्याकांड को अपनी आंखों से देखा और इसका बदला लेने का संकल्प लिया।
13 मार्च 1940: बदले की आग ने लिया रूप
लंबी प्रतीक्षा और तैयारी के बाद 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में उन्होंने जनरल माइकल ओ’डायर को गोलियों से भून डाला — जो जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए जिम्मेदार था।
31 जुलाई 1940: बलिदान का दिन
31 जुलाई 1940 को उधम सिंह को लंदन में फांसी दी गई। उन्होंने फांसी से पूर्व तीन बार “इंकलाब ज़िंदाबाद” का नारा लगाकर ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी।
अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील
मेहर सिंह बांगड़ ने कहा कि उधम सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ आवाज़ बनकर उभरे थे। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि
“31 जुलाई को सुबह 11 बजे युवक साहित्य सदन सिरसा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस अमर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करें।”
यह श्रद्धांजलि सभा न केवल वीर शहीद को नमन करने का अवसर है, बल्कि आज की पीढ़ी को उनके बलिदान और साहस से प्रेरणा लेने का भी अवसर है।
