कांवड़ यात्रा में धर्म के नाम पर यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं

  • संवाददाता – मनोज कुमार यादव

एटा। कांवड़ यात्रा भक्ति और आस्था का पर्व है, जिसमें लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री जैसे तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर भगवान शिव को अर्पित करने के लिए पैदल, बाइक या वाहनों से यात्रा करते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और समाज में एक विशेष धार्मिक उत्साह का प्रतीक है। किंतु हाल के वर्षों में यह धार्मिक यात्रा कई स्थानों पर अनुशासन और कानून की सीमाओं को लांघने लगी है।

सबसे बड़ी चिंता का विषय है—यात्रा के दौरान यातायात नियमों की अनदेखी।
कई कांवड़िए तेज़ रफ्तार बाइकों पर लाउड म्यूज़िक बजाते हुए, सड़कों पर स्टंट करते हुए और गलत दिशा में वाहन चलाते हुए देखे जाते हैं। सड़कों पर खुलेआम नाच-गाना, रास्तों को अवरुद्ध कर देना और पुलिस के निर्देशों की अवहेलना आम बात हो गई है।

धार्मिक यात्रा में अनुशासन और संयम की अपेक्षा होती है, परंतु कुछ युवाओं के लिए यह पर्व मज़ाक, स्टंट और दिखावे का माध्यम बनता जा रहा है। धार्मिक भावनाओं की आड़ में यदि कोई कानून तोड़े, तो वह समाज और धर्म दोनों के लिए हानिकारक है।

पुलिस और प्रशासन भी कई बार “धार्मिक भावना आहत न हो” के भय से सख्त कार्रवाई करने से कतराते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि आम नागरिकों को भारी ट्रैफिक जाम, एंबुलेंस के रास्ते बंद, व्यापारिक नुकसान और दुर्घटनाओं जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कांवड़ यात्रा श्रद्धा का पर्व है, इसे अराजकता का रूप न लेने दिया जाए। धर्म का पालन कानून के साथ होना चाहिए, कानून के विरुद्ध नहीं। यही सच्ची भक्ति और सभ्य समाज की पहचान है।

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