मिर्जापुर में छोटे बच्चों को बैठाकर पिलाई जा रही सिगरेट, स्कूल टाइम में खुलेआम उड़ाई जा रही कानून की धज्जियां
मिर्जापुर। जनपद मिर्जापुर के कोतवाली शहर थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां स्कूल समय में 14 से 16 वर्ष के छोटे बच्चों को सिगरेट पीते हुए कैमरे में कैद किया गया है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ शहर के कई स्कूलों के पास खुलेआम हो रहा है, जहां सिगरेट की दुकानें बच्चों को नशे की लत की ओर धकेल रही हैं।
वीडियो में दिख रहा मंजर बेहद पीड़ादायक है –
स्कूल यूनिफॉर्म में मासूम बच्चे, पीठ पर स्कूल बैग, और हाथ में सुलगती सिगरेट! यह दृश्य न सिर्फ समाज के लिए शर्मनाक है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर एक काला धब्बा भी है।
माता-पिता और शिक्षक भी अनजान
अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि उनका बच्चा स्कूल में पढ़ाई कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि वह स्कूल के बगल की सिगरेट की दुकान पर बैठा धुएं के छल्ले उड़ा रहा है। बच्चों को मोबाइल तो दे दिया गया, लेकिन मोबाइल और दोस्ती के नाम पर वह ऐसे वातावरण में पहुंच गए हैं जहां नशा अब आदत बनता जा रहा है।
स्कूल के पास दुकानों पर खुलेआम बिक रही है सिगरेट
शहर के कई स्कूलों के आस-पास मौजूद सिगरेट की दुकानों पर नाबालिगों को धड़ल्ले से सिगरेट बेची जा रही है। दुकानदारों को न उम्र की चिंता है, न कानून की। सवाल उठता है कि आखिर पुलिस प्रशासन इन दुकानों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? क्या बच्चों के भविष्य से बड़ा है मुनाफा?
नशे की शुरुआत यहीं से होती है
सिगरेट से शुरू हुआ यह सफर गांजा, शराब और फिर हीरोइन तक पहुंचता है। नतीजा – बर्बाद जीवन, टूटा परिवार और अपराध की दुनिया।
समाधान क्या है?
इस गंभीर समस्या का हल सिर्फ पुलिस से नहीं, बल्कि समाज के हर जिम्मेदार नागरिक, अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी से निकलेगा।
स्कूलों में नशा मुक्ति पर विशेष सेमिनार हों
अभिभावक बच्चों पर नज़र रखें
हर संदिग्ध दुकान की जांच हो
और सख्त नियम बनें कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सिगरेट बेचने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो।
यह रिपोर्ट किसी पर आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने के लिए है। अब भी वक्त है, बच्चों को सिगरेट के धुएं से निकालकर किताबों और संस्कारों की ओर लौटाया जाए।
वरना यह “मिर्जापुर” पूरे देश के लिए एक चेतावनी बन जाएगा।
