राधिका यादव मर्डर केस: इंस्टाग्राम रील, करियर का दबाव या परिवार की नाराजगी? जानिए क्यों पिता ने टेनिस खिलाड़ी बेटी को मारी गोली

गुरुग्राम में दिल दहला देने वाला मर्डर, पिता ने ही बेटी को मारी तीन गोलियां

गुरुग्राम: गुरुग्राम के सेक्टर-57 में गुरुवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना में 25 वर्षीय राज्य स्तरीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या कर दी गई। आरोप है कि उनके पिता दीपक यादव ने बेटी को तीन गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद पुलिस ने पिता को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना कहां और कब हुई?
यह हत्या गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे राधिका के घर की रसोई में हुई। परिवार सेक्टर 57 स्थित एक फ्लैट में रहता था।

राधिका की हत्या के पीछे की वजह क्या थी?
जांच में सामने आया है कि राधिका की टेनिस अकादमी से परिवार की आजीविका जुड़ी हुई थी और पिता दीपक यादव को समाज में इसका मजाक उड़ाया जाता था। वे चाहते थे कि राधिका अकादमी बंद कर दे, लेकिन राधिका ने इनकार कर दिया।

पुलिस के अनुसार, पिता दीपक पिछले 15 दिनों से अवसाद में थे। एफआईआर में दर्ज बयानों के मुताबिक, दीपक ने समाज की आलोचना और ‘अपमान’ से आहत होकर यह कदम उठाया।

क्या दीपक यादव ने अपना जुर्म कबूल किया?
हां। सहायक पुलिस आयुक्त यशवंत यादव ने बताया कि दीपक यादव ने हत्या की बात स्वीकार की है और कहा है कि वह अपनी बेटी की अकादमी बंद करवाना चाहता था। समाज में हो रही बेटी की कमाई पर निर्भरता की बातें उन्हें परेशान कर रही थीं।

पुलिस अन्य संभावनाओं की भी जांच कर रही है
एफआईआर गुरुग्राम के सेक्टर-56 थाना में दर्ज की गई है।
पुलिस इस मामले में इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई रील, पिता के किसी संभावित अफेयर, और पारिवारिक तनाव जैसे अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

राधिका यादव कौन थीं?
राधिका एक प्रतिभाशाली टेनिस खिलाड़ी थीं। उन्होंने 2018 में स्कॉटिश हाई इंटरनेशनल स्कूल से कॉमर्स में बारहवीं की परीक्षा पास की थी और बचपन से ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था।

हाल में उन्हें कंधे की चोट लगी थी और वे फिजियोथेरेपी ले रही थीं।
राधिका सोशल मीडिया पर भी सक्रिय थीं और अकसर अपने पिता के साथ ट्रॉफी जीतने की खुशी साझा करती थीं।

मां ने पुलिस को बयान देने से किया इनकार
एफआईआर के अनुसार, राधिका की मां मंजू यादव ने पुलिस को बयान देने से इनकार कर दिया और कहा कि वह बुखार से पीड़ित हैं और उन्होंने कुछ नहीं देखा।

यह घटना न केवल एक परिवार की भीतरू पीड़ा को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि सामाजिक दबाव और पितृसत्तात्मक सोच किस हद तक जानलेवा साबित हो सकती है।

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