देशभर में केंद्र सरकार के खिलाफ हड़ताल, पंजाब रोडवेज कर्मचारियों ने किया चक्का जाम
कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली, नियमित भर्ती और स्थायीकरण की उठाई मांग
अमृतसर/चंडीगढ़। केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों और श्रमिक विरोधी कानूनों के खिलाफ आज देशभर में 32 ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर व्यापक हड़ताल का आयोजन किया गया। इसी क्रम में पंजाब में भी पंजाब रोडवेज कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी यूनियन (CTU) के नेतृत्व में चक्का जाम किया गया।
इस चक्का जाम में रोडवेज कर्मचारियों के साथ-साथ कई जत्थेबंदियों और संगठन के सदस्यों ने भी भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के चार श्रम कानूनों को काला कानून बताते हुए इसके विरोध में आवाज़ बुलंद की।
9 जुलाई से 11 जुलाई तक पंजाब रोडवेज और पनबस कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। यूनियन नेताओं का दावा है कि साढ़े सात हजार से अधिक कर्मचारी पंजाब भर से हड़ताल पर हैं।
मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे कर्मचारी
प्रदर्शनकारियों ने एलान किया कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो कल मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को कई बार ज्ञापन और चेतावनी देने के बावजूद कर्मचारियों की मांगों को नज़रअंदाज़ किया गया है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि आज चंडीगढ़ में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक हो रही है। यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो हड़ताल को वापस लिया जा सकता है।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
कर्मचारियों ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार बनने से पहले कर्मचारियों से जो वादे किए गए थे, उन्हें आज तक पूरा नहीं किया गया। विशेष रूप से पुरानी पेंशन बहाली, नियमित भर्ती, और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को स्थायी करने जैसे मुद्दों को लेकर नाराजगी जताई गई।
अमृतसर डिपो से नहीं निकली एक भी बस
अमृतसर में प्रदर्शनकारियों ने डिपो से एक भी बस को बाहर नहीं निकलने दिया। रोडवेज डिपो के बाहर जोरदार नारेबाजी करते हुए कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया।
मुख्य मांगे:
केंद्र सरकार के चार श्रम कानूनों की वापसी
पुरानी पेंशन योजना की बहाली
नियमित भर्ती की प्रक्रिया शुरू करना
आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को स्थायी करना
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो संघर्ष और तेज किया जाएगा।
