“जहां शराब पर है पाबंदी, वहां सॉफ्ट ड्रिंक्स पर दांव लगा रही पाकिस्तान की टॉप ब्रुअरी”

रावलपिंडी, 4 जुलाई (एपी): पाकिस्तान में जहां मुस्लिमों के लिए शराब प्रतिबंधित है, वहीं देश की सबसे पुरानी और बड़ी शराब निर्माता कंपनी मुरी ब्रुअरी अब सॉफ्ट ड्रिंक्स के कारोबार में अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश कर रही है।

165 साल पुरानी यह कंपनी ब्रिटिश काल में स्थापित हुई थी और आज भी शराब के प्रतिबंधों के बावजूद मजबूत वित्तीय स्थिति बनाए हुए है। लेकिन सरकार की सख्त नीतियों, भारी टैक्स और सीमित विपणन विकल्पों के चलते अब कंपनी के चेयरमैन इस्पनयार बांधारा ने गैर-मादक पेय पदार्थों की ओर रुख किया है।

बांधारा कहते हैं, “हम शराब बेचकर बैठे नहीं रह सकते। बाजार सीमित है, इसलिए हमें गैर-मादक क्षेत्र पर ध्यान देना होगा। मैं खुद को शराब व्यवसायी की बजाय सॉफ्ट ड्रिंक उद्योग में नेतृत्वकर्ता के रूप में देखना चाहता हूं।”

शराब पर नियंत्रण, सॉफ्ट ड्रिंक्स में संभावनाएं
सरकार न केवल शराब की कीमतें तय करती है, बल्कि इसकी बिक्री के स्थान और उपभोक्ता वर्ग को भी नियंत्रित करती है। मुर्री ब्रुअरी को अपने शराब उत्पादों का विज्ञापन करने की अनुमति नहीं है और न ही इसे ऑनलाइन बेचा जा सकता है। पिछले साल सरकार ने कंपनी से 35 मिलियन डॉलर टैक्स के रूप में वसूले।

हालांकि कंपनी एनर्जी ड्रिंक, जूस और माल्टेड ड्रिंक्स पहले से बना रही है, लेकिन अभी तक इनकी पहचान कोका-कोला और पेप्सी जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों के मुकाबले कम है। फिर भी इस खंड में दोहरे अंकों की वृद्धि देखी जा रही है।

बांधारा का लक्ष्य देश की 64% युवा आबादी को टारगेट करना है। “गैर-मादक पेय में पैसा थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन यह बाज़ार अधिक सुरक्षित और स्थिर है।”

शराब की दुनिया : पाकिस्तान में एक प्रतिबंधित सच
पाकिस्तान में शराब मुस्लिमों के लिए प्रतिबंधित है, लेकिन गैर-मुस्लिम नागरिकों और विदेशी राजनयिकों को लिमिटेड मात्रा में शराब खरीदने के लिए परमिट दिया जाता है। पाँच सितारा होटल, रेस्टोरेंट और कुछ विशेष वाइन शॉप्स इस सीमित बाजार का हिस्सा हैं।

कई जगहों पर ग्राहक कार में बैठकर शराब लेते हैं या होम डिलीवरी के जरिए प्राप्त करते हैं। सिंध जैसे प्रांतों में हिंदू और पारसी अल्पसंख्यक समुदाय शराब की अधिकृत बिक्री में शामिल हैं।

बांधारा, जो स्वयं पारसी हैं, मुर्री ब्रुअरी के प्रमुख टेस्टर्स में से एक हैं, क्योंकि केवल गैर-मुस्लिम ही कंपनी के शराब उत्पादों का स्वाद ले सकते हैं। उन्होंने कहा, “अगर जर्मन, चीनी और यूरोपीय दूतावास मेरे बीयर के ग्राहक हैं, तो गुणवत्ता पर मुझे कोई संदेह नहीं।”

नया खतरा : चीन की प्रतिस्पर्धा
ब्रुअरी को अब चीनी संचालित हूई कोस्टल ब्रुअरी से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिसने 2021 में बलूचिस्तान में बीयर उत्पादन शुरू किया, खासकर वहां काम कर रहे हजारों चीनी कर्मचारियों के लिए।

बांधारा इस पर सवाल उठाते हैं: “अगर इस्लामी नियम मेरे लिए हैं, तो चीनी ब्रुअरी को लाइसेंस कैसे मिल गया?”

मुर्री ब्रुअरी अब खुद को एक व्यापक पेय कंपनी के रूप में देख रही है, जो सॉफ्ट ड्रिंक्स के जरिए पाकिस्तान के तेजी से बदलते बाजार में अपनी नई भूमिका तलाश रही है।

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