सस्टेनेबिलिटी अब केवल नारा नहीं, अनिवार्यता बन गई है”: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

नई दिल्ली, 23 जून 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को कहा कि सस्टेनेबिलिटी यानी सतत विकास अब केवल एक नारा नहीं बल्कि एक अनिवार्यता बन चुका है। वे राजधानी में ‘द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ के 12वें नेशनल स्टूडेंट्स कॉन्वोकेशन 2025 समारोह को संबोधित कर रही थीं।

जलवायु परिवर्तन के संकट पर चिंता जताते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, “अब वह समय चला गया जब कॉरपोरेट संस्थान सिर्फ लाभ कमाने की सोच रखते थे। आज उन्हें पर्यावरणीय लागतों को भी ध्यान में रखना होगा।”

उन्होंने कॉस्ट अकाउंटेंट्स से कहा कि उनके पास कौशल है जिससे वे पृथ्वी के भविष्य को संरक्षित करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। “अकाउंटिंग और जवाबदेही (accountability) आपस में गहराई से जुड़ी हैं,” राष्ट्रपति ने कहा।

राष्ट्रपति मुर्मु ने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की और कहा कि “पर्यावरण की रक्षा में युवाओं की भूमिका अहम है।”

इस अवसर पर कॉरपोरेट मामलों की सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने भी संबोधन दिया और कहा कि भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के रास्ते में कॉस्ट और मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने इन पेशेवरों से तकनीक, नवाचार और लचीलापन अपनाने का आग्रह किया।

About The Author

Leave A Reply

Your email address will not be published.