ईरान-इज़रायल संघर्ष: कांग्रेस ने सरकार से नैतिक साहस दिखाने को कहा, अमेरिकी बमबारी की निंदा न करने पर आलोचना की

नई दिल्ली, 23 जून 2025: ईरान पर अमेरिकी बमबारी और इज़राइल की आक्रामकता को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने मोदी सरकार की चुप्पी को “नैतिक साहस की कमी” करार दिया और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु स्थलों पर हमलों की खुलकर आलोचना की।

कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य हमला उनके ही वार्ता की अपीलों का “मज़ाक” बनाता है। उन्होंने कहा, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोहराती है कि ईरान के साथ तत्काल कूटनीति और संवाद अत्यावश्यक है। भारत सरकार को अब तक से अधिक नैतिक साहस का प्रदर्शन करना चाहिए।”

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मोदी सरकार ने न तो अमेरिका की बमबारी की आलोचना की और न ही इज़राइल की आक्रामकता, बमबारी और लक्षित हत्याओं की। ग़ाज़ा में हो रहे नरसंहार पर भी सरकार की चुप्पी असहनीय है।”

इस बयान से पहले अमेरिकी वायु सेना ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों—फोर्दो, नतांज और इस्फ़हान—पर हमला किया, जिससे ईरान-इज़राइल संघर्ष और तेज हो गया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और IAEA प्रमुख ने भी चेतावनी दी है कि यदि कूटनीति विफल होती है, तो हिंसा की भयावहता “अकल्पनीय स्तर” तक पहुंच सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (22 जून) को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से बातचीत में भारत की “गंभीर चिंता” जताई और तुरंत शांति व संवाद का आग्रह किया।

इससे पहले कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी भारत सरकार की चुप्पी को “आवाज़ की नहीं, मूल्यों की हार” बताते हुए आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने फिलिस्तीन-इज़राइल मुद्दे पर भारत की दशकों पुरानी दो-राष्ट्र समाधान की नीति का त्याग कर दिया है।

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