नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का अत्यंत पावन और विशेष महत्व है। प्रत्येक माह आने वाली पूर्णिमा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से शुभ मानी जाती है। वर्तमान में हिंदी पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह चल रहा है, और इस माह की पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। साथ ही चंद्रमा का पूजन भी सुख-शांति और मानसिक शुद्धता के लिए शुभ माना गया है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 10 जून 2025 को सुबह 11:35 बजे शुरू होगी और इसका समापन 11 जून को दोपहर 1:13 बजे होगा।
उदयातिथि के अनुसार व्रत और पूजन 11 जून 2025 (बुधवार) को रखा जाएगा।
स्नान-दान का मुहूर्त
गंगा स्नान का शुभ समय: सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक
अमृत काल: सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:40 बजे से 3:36 बजे तक
इन मुहूर्तों में स्नान और दान करने से पुण्य प्राप्त होता है और पितरों की कृपा बनी रहती है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है।
भगवान सत्यनारायण की कथा व्रत-पूजन के साथ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और प्रेम बना रहता है।
मान्यता है कि इस दिन किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
