कोविड-19 मामलों में वृद्धि के बीच राहत: नए वेरिएंट गंभीर खतरा नहीं – टॉप भारतीय वैज्ञानिक

देश में कोविड के मामलों में बढ़ोतरी, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं: वैज्ञानिकों की राय नए सब-लाइनिएज से हो रही केसों में बढ़ोतरी, लेकिन खतरा कम: डॉ. विनीता बाल

नई दिल्ली: भारत में एक बार फिर कोविड-19 के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन शीर्ष भारतीय जैव विज्ञानी डॉ. विनीता बाल ने स्पष्ट किया है कि नए वेरिएंट गंभीर खतरा नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वायरस के नए सब-लाइनिएज फैल तो रहे हैं, लेकिन इनसे बीमारी की गंभीरता और मृत्यु दर में वृद्धि नहीं हो रही है।

मृत्यु दर सीमित, मुख्य रूप से बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग प्रभावित
डॉ. बाल ने कहा कि मौजूदा समय में जिन लोगों की मृत्यु हो रही है, वे अधिकतर बुजुर्ग या पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोग हैं। ऐसे भी कई मरीज हैं जो पहले की कोविड लहरों में संक्रमित होकर अब भी स्वास्थ्य जटिलताओं से जूझ रहे हैं।

2021 की तरह नहीं है यह वायरस: जनसंख्या में बनी है इम्युनिटी
डॉ. विनीता बाल ने बताया कि 2021 के डेल्टा वेरिएंट की तुलना में आज की स्थिति काफी अलग है। तब वायरस नया था और जनसंख्या में प्रतिरक्षा नहीं थी, जिससे व्यापक स्तर पर गंभीर बीमारी फैली। लेकिन आज अधिकांश लोग संक्रमित हो चुके हैं या वैक्सीन की कम से कम एक डोज ले चुके हैं, जिससे सामूहिक प्रतिरक्षा विकसित हो चुकी है।

कोविड अब फ्लू की तरह: समय-समय पर नए वेरिएंट, लेकिन खतरा कम
उनका मानना है कि कोविड-19 अब मौसमी फ्लू जैसा बन गया है। समय-समय पर नए वेरिएंट सामने आते रहेंगे, लेकिन उनका असर मुख्यतः उच्च जोखिम वाले वर्गों तक सीमित रहेगा।
“इसका मतलब यह नहीं कि वायरस समाप्त हो गया है, लेकिन यह अब जनसामान्य के लिए गंभीर खतरा नहीं है,” उन्होंने कहा।

सतर्क रहें, लेकिन घबराएं नहीं
डॉ. बाल ने कहा कि हालांकि नए वेरिएंट अधिक संक्रामक हो सकते हैं, लेकिन वे गंभीर बीमारी नहीं फैला रहे। उन्होंने लोगों को बुजुर्गों, पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों और पहले गंभीर रूप से प्रभावित लोगों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी।

कोविड अब स्थानिक (एंडेमिक) चरण में: जीने के तरीके में बदलाव जरूरी
डॉ. बाल के अनुसार कोविड अब एंडेमिक अवस्था में प्रवेश कर चुका है। इसका अर्थ है कि यह वायरस हमेशा हमारे बीच रहेगा, जैसे कि फ्लू। उन्होंने कहा कि यदि 2020 से 2022 के बीच आपकी समुदाय में इम्युनिटी बन चुकी है, तो अब कोई भी नया वेरिएंट गंभीर खतरा नहीं बनेगा।

ICMR और पूर्व AIIMS प्रमुख की भी राय समान
पूर्व एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया और ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने भी कहा है कि कोविड अब स्थानिक रोग बन गया है और वर्तमान संक्रमण हल्के लक्षणों वाला है।
डॉ. बहल ने लोगों से कहा, “तुरंत कोई चिंता की बात नहीं है, केवल सामान्य सावधानियां बरतें।”

देश में कोविड के मामलों में वृद्धि हो रही है, लेकिन पैनिक की जरूरत नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि टीकाकरण और पूर्व संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा के कारण भारत की जनसंख्या अब बेहतर ढंग से वायरस का सामना कर सकती है।

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