लक्ष्मीनिया की चाहत में बावले हुए बिजली विभाग के अधिकारी, बभनापुर में उपभोक्ता का बिल घटा 76,328 से 33,140 रुपये

अम्बेडकर नगर। जिले में बिजली विभाग में भ्रष्टाचार अब खुलेआम हो रहा है। विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारी रुपयों की चमक में इस कदर अंधे हो गए हैं कि नियम-कानून का कोई मोल नहीं रह गया। ताजा मामला बलयाजगदीशपुर विद्युत उपकेंद्र के टांडा फीडर अंतर्गत ग्राम सभा बभनापुर (अमियां) का है, जहां उपभोक्ता शिवपूजन यादव का लंबित बिजली बिल 76,328 रुपये से घटाकर मात्र 33,140 रुपये कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, यह बकाया बिल कई वर्षों से लंबित था। न तो मीटर बदला गया, न खपत में कोई तकनीकी त्रुटि पाई गई, इसके बावजूद बिल में भारी कटौती कर दी गई। सवाल उठता है कि जब मीटर और रीडिंग दोनों सही थे, तो आखिर किस आधार पर यह राहत दी गई? चर्चा है कि अधिकारियों की जेब गर्म कर ‘लक्ष्मीनिया’ के दम पर यह खेल रचा गया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बलयाजगदीशपुर टांडा क्षेत्र में फरवरी माह में भी इसी तरह के कई बिलों में संशोधन कर लाखों रुपये का घोटाला किया गया है। यदि उच्च अधिकारी जांच कराएं, तो बड़ा भ्रष्टाचार सामने आ सकता है।

50 लाख की वसूली कर जेई हुआ फरार
इसी तरह का एक और मामला सुरापुर फीडर टांडा का है, जहां अवर अभियंता (जेई) सुल्तान अहमद पर उपभोक्ताओं से बिजली बिल में कटौती के नाम पर लगभग 50 लाख रुपये की अवैध वसूली का आरोप है। बताया जाता है कि वह पैसा लेकर फरार हो गया और बीते एक माह से जिले से लापता है। वायरल वीडियो में सुल्तान अहमद को उपभोक्ताओं से पैसे लेते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, फिर भी न तो उसकी गिरफ्तारी हुई, न कोई सख्त कार्रवाई।

प्रशासन की चुप्पी, जनता की बेबसी
अम्बेडकर नगर के एसी ने पुष्टि की है कि सुल्तान अहमद को टांडा एससीएन द्वारा नोटिस जारी किया गया है। लेकिन जनता का सवाल है कि जब सभी साक्ष्य मौजूद हैं, तो अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? आखिर किसे बचाने की कोशिश हो रही है?

भ्रष्टाचार का नंगा नाच
बिजली विभाग में अब कानून नहीं, लक्ष्मीनिया की भाषा बोली और समझी जा रही है। आम जनता सही बिल के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाती रह जाती है, लेकिन जब तक जेब में ‘कुछ खास’ न गिरे, तब तक साहबों के दरवाजे नहीं खुलते।

जनता का सवाल – कब होगी कार्रवाई?
जिले में लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार अब विभाग की आदत बन चुका है। अब जनता पूछ रही है – कब होगी कार्रवाई? और क्या उन्हें कभी न्याय मिलेगा?

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