57 बार ट्रांसफर हुए ईमानदार IAS अफसर अशोक खेमका आज होंगे रिटायर, बोले – “कोई भी जांच से ऊपर नहीं”
34 वर्षों की सेवा के बाद विदाई की घड़ी
नई दिल्ली: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के ईमानदार और सिद्धांतवादी अधिकारी अशोक खेमका आज यानी 30 अप्रैल 2025 को प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। खेमका की 34 वर्षों की शानदार सेवा और 57 बार तबादलों का सफर उनकी नैतिक प्रतिबद्धता और साहसिक सोच का प्रतीक रहा है।
रॉबर्ट वाड्रा की जमीन डील को रद्द कर आए सुर्खियों में
अशोक खेमका ने 2012 में गुरुग्राम में रॉबर्ट वाड्रा (कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के दामाद) से जुड़ी एक विवादित जमीन डील की म्यूटेशन को रद्द कर राष्ट्रीय पहचान बनाई थी। इस कदम ने उन्हें सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ खड़े एक ईमानदार अफसर के रूप में स्थापित कर दिया।
शिक्षा में भी मिसाल, कई डिग्रियां प्राप्त कीं
13 अप्रैल 1965 को कोलकाता में जन्मे खेमका की शैक्षणिक उपलब्धियाँ भी अद्वितीय हैं। उन्होंने IIT खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में B.Tech (1988), TIFR से PhD, पंजाब यूनिवर्सिटी से LLB और फाइनेंस में MBA की डिग्रियाँ हासिल कीं। ये उनके निरंतर ज्ञान के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
2024 में दोबारा बने ट्रांसपोर्ट विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी
अशोक खेमका को दिसंबर 2024 में परिवहन विभाग में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी बनाया गया था। यह वही विभाग था जहाँ से उन्हें मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के पहले कार्यकाल में मात्र 4 महीने में हटा दिया गया था।
विजिलेंस विभाग संभालने की पेशकश, भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग की अपील
2023 में खेमका ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विजिलेंस विभाग का जिम्मा संभालने की पेशकश की थी ताकि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ सकें। उन्होंने लिखा, “कोई भी, चाहे कितना भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, जांच से मुक्त नहीं होना चाहिए।”
न्याय की कीमत पर अलग-थलग, फिर भी कोई पछतावा नहीं
पिछले 12 वर्षों में खेमका को कई बार “लो-प्रोफाइल” पदों पर भेजा गया, जिसमें चार बार आर्काइव विभाग में पोस्टिंग शामिल है — इनमें से तीन बार भाजपा सरकार के दौरान और एक बार कांग्रेस सरकार के समय 2013 में।
2023 में पदोन्नत साथियों को बधाई देते हुए उन्होंने ट्वीट किया:
“सीधे पेड़ पहले काटे जाते हैं। कोई पछतावा नहीं। नई ऊर्जा के साथ, मैं अपनी राह पर चलता रहूंगा।”
खेमका की विरासत: ईमानदारी, सादगी और निडरता का प्रतीक
IAS अशोक खेमका की सेवा हमेशा ईमानदारी, प्रशासनिक निष्पक्षता और नैतिक साहस का प्रतीक रही है। बार-बार स्थानांतरण और सीमित भूमिकाओं के बावजूद उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
उनकी विदाई एक युग का अंत है, पर उनकी प्रेरणा भावी पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक बनी रहेगी।
