इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला — भड़काऊ पोस्ट को लाइक करना अपराध नहीं, शेयर करना ही माना जाएगा अपराध
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स के लिए राहत भरा फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भड़काऊ पोस्ट को सिर्फ लाइक करना आपराधिक कृत्य नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि पोस्ट को लाइक करना और शेयर करना दो अलग-अलग बातें हैं, और अपराध की श्रेणी में वह तभी आता है जब पोस्ट को शेयर या फॉरवर्ड किया जाए।
न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए आगरा निवासी इमरान खान के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
मामला क्या था?
मामला मंटोला थाना क्षेत्र का है। इमरान खान पर आरोप था कि उन्होंने फेसबुक पर ‘चौधरी फरहान उस्मान’ नामक आईडी से की गई एक भड़काऊ पोस्ट को लाइक किया। इस पोस्ट में विरोध-प्रदर्शन व राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के लिए लोगों को आगरा कलेक्ट्रेट पर जुटने का आह्वान किया गया था।
पुलिस के अनुसार, इस पोस्ट को देखकर एक विशेष समुदाय के करीब 600-700 लोग बिना अनुमति के जुलूस निकालने लगे, जिससे शांति व्यवस्था प्रभावित हुई। इसके बाद इमरान के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई।
ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लेकर इमरान को आरोपी के रूप में तलब किया था, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा —
“किसी पोस्ट को तब ही ‘प्रकाशित’ माना जा सकता है जब उसे शेयर या फॉरवर्ड किया जाए। सिर्फ लाइक करना प्रकाशन नहीं है।”
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि
“आईटी एक्ट की धारा 67 केवल अश्लील सामग्री के प्रकाशन पर लागू होती है, और भड़काऊ पोस्ट को लाइक करने पर इसे लागू नहीं किया जा सकता।”
पुलिस की दलील और कोर्ट का जवाब
पुलिस ने दावा किया कि इमरान ने अपने फेसबुक से भड़काऊ पोस्ट हटा दिया है, लेकिन ऐसी सामग्री व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया पर फैली हुई थी। हालांकि, केस डायरी में यह बात साफ हुई कि इमरान ने पोस्ट को केवल लाइक किया था, शेयर या फॉरवर्ड नहीं किया।
इस आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ लाइक करने भर से कोई आपराधिक मामला नहीं बनता, और इमरान के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
