रामपुर: बस्तर के महाराजा कमल चंद्र भंजदेव का नूर महल में स्वागत

रियासतों के वंशजों का एकता और समृद्ध संस्कृति का परिचय

रामपुर: बस्तर रियासत के 22वें महाराजा कमल चंद्र भंजदेव ने नूर महल में परंपरागत स्वागत समारोह में हिस्सा लिया और कहा कि रियासतों के वंशज आज भी एक सूत्र में बंधे हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राजघरानों की संस्कृति और परंपराएं समान हैं, और यह रिश्ता हमेशा के लिए अटूट रहेगा।

स्वागत समारोह और महाराजा की बात

बस्तर के महाराजा कमल चंद्र भंजदेव का बुधवार को नूर महल पहुंचने पर पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां, उनके बेटे नवाबजादा हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां और इंटैक रुहेलखंड चैप्टर के सह-संयोजक काशिफ खां ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया।

नवेद मियां ने बताया कि बस्तर के महाराजा कमल चंद्र भंजदेव भाजपा के नेता हैं और वे प्रवीर सेना (सामाजिक संगठन) के संस्थापक व माँ दंतेश्वरी के प्रथम सेवक (माटी पुजारी) भी हैं। वे छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं।

रामपुर की कला, संस्कृति और धरोहरों का महत्व

महाराजा कमल चंद्र भंजदेव ने इस अवसर पर कहा कि रामपुर की कला, संस्कृति और धरोहरें आज भी एक मिसाल हैं और इस रियासत की शान और प्रतिष्ठा की जितनी सराहना की जाए, उतनी कम है।

पूर्व मंत्री नवेद मियां ने कहा कि महाराजा के रामपुर आने पर उन्हें गर्व का अहसास हुआ है, और उन्होंने याद दिलाया कि रामपुर के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां के देश की सभी रियासतों से अच्छे संबंध थे, जो आज भी कायम हैं।

इस मौके पर उपस्थित अतिथि

इस अवसर पर गुजरात के अर्जुन सिंह, राजस्थान के देवी सिंह, पुणे के योगेश कोंदरे और अमित भी मौजूद रहे।

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