हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का महत्व, जानें साल का आखिरी शनि प्रदोष व्रत कब है?

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यधिक महत्व दिया गया है और यह व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है, और इस दिन उनका विधि-विधान से पूजन किया जाता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। आइए जानते हैं कि इस साल का आखिरी प्रदोष व्रत कब है?

कब है साल का आखिरी प्रदोष व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 दिसंबर को सुबह 2 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 29 दिसंबर को सुबह 3 बजकर 32 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, साल का आखिरी प्रदोष व्रत 28 दिसंबर को रखा जाएगा, जो कि शनिवार को पड़ रहा है। इस कारण इसे ‘शनि प्रदोष व्रत’ कहा जाएगा। प्रदोष व्रत का नाम इस आधार पर रखा जाता है कि वह किस दिन पड़ रहा है, जैसे सोमवार को आने वाला प्रदोष व्रत ‘सोम प्रदोष व्रत’ कहलाता है और शनिवार को आने वाला प्रदोष व्रत ‘शनि प्रदोष व्रत’ कहा जाता है।

शनि प्रदोष व्रत 2024 का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत के दिन भोलेनाथ का पूजन विशेष रूप से प्रदोष काल (शाम के समय) में किया जाता है। 28 दिसंबर को शनि प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 21 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं और उनका पूजन फलदायी माना जाता है।

शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि
शनि प्रदोष व्रत के दिन पूजा विधि निम्नलिखित है:
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और मंदिर में चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
2. चौकी पर भगवान शिव एवं उनके परिवार की प्रतिमा स्थापित करें।
3. शिवलिंग पर जल अर्पित करें और चंदन से तिलक करें।
4. फिर घी का दीपक जलाकर भोग अर्पित करें।
5. दिनभर उपवासी रहते हुए शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिक जी का पूजन करें।
6. शिवलिंग पर बेलपत्र, आक के फूल और धतूरा अर्पित करें।
7. शिव चालीसा का पाठ करें और शिव जी की आरती करें।
8. पूजा के बाद व्रत का पारण करें।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। इस संदर्भ में विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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