Death Anniversary: बनारसीपन से ओतप्रोत तबला सम्राट पंडित किशन महाराज ने दुनिया भर में तबले को दिलाई पहचान

लय व स्वर का यह साधक 4 मई 2008 को ब्रह्म में हो गया लीन

नई दिल्ली। पूरी दुनिया में काशी के संगीत जगत को नई ऊंचाई देने वाले पद्मविभूषण तबला सम्राट पंडित किशन महाराज की आज पुण्यतिथि है। किशन महाराज का जिंदगी जीने का अंदाज़ बहुत बिंदास रहा। जो बनारसीपन से ओतप्रोत था। उन्होंने जिंदगी को हमेशा आज के आईने में देखा और अपनी मर्जी के मुताबिक बिंदास जिया। जीवन के साथ और जीवन के बाद भी बनारस की शान रहे तबला सम्राट की कई दूसरी खूबियां भी थीं। आज उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं उनके बारे में…

जीवन परिचय
पण्डित किशन महाराज का जन्म 3 सितम्बर 1923 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के कबीर चौक मुहल्ले में एक संगीतज्ञ परिवार में हुआ था। कृष्ण जन्माष्टमी पर आधी रात को जन्म होने के कारण इनका नाम किशन रखा गया। इनके पिता का नाम पण्डित हरि महाराज था।

शिक्षा
किशन महाराज की प्रारम्भिक शिक्षा पिता की देखरेख में हुआ। किशन महाराज ने तबले के तीनों अंगो – नृत्य , गायन और वादन ( संगत और स्वतन्त्र वादन ) की शिक्षा ली है।

निधन
4 मई 2008 को लय व स्वर का यह साधक ब्रह्म में लीन हो गया।

संगीत में योगदान
पण्डित किशन महाराज एक श्रेष्ठ कलाकार होने के साथ साथ अच्छे सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। किशन महाराज जी वज्रासन में बैठकर वीर मुद्रा में तबला बजाते थे ।

उपलब्धियां
किशन महाराज को पदमश्री सम्मान , केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार, पद्मविभूषण सम्मान और उत्तर प्रदेश रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

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