सौलत पब्लिक लाइब्रेरी में 91वां स्थापना दिवस:, हमारा समाज, हमारी पहचान’ पर गोष्ठी का आयोजन

रामपुर। रामपुर की ऐतिहासिक सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के 91वें स्थापना दिवस के अवसर पर, लाइब्रेरी के अल्हाज हिमायत उल्लाह खान हॉल में “हमारा समाज, हमारी पहचान” विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के अध्यक्ष डॉ. महमूद अली खान ने की।
इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें प्रोफेसर मुहम्मद अरशद रिजवी, व्यापार मंडल के अध्यक्ष शैलेंद्र शर्मा, रजा इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. फैजान सईद, डॉ. अरविंद कुमार गौतम, सैयद अब्दुल्ला तारिक, ताहिर अंजुम, अब्दुल रऊफ खान और नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हुए शाज़िया हसन, लायेबा महबूब, सैयद मोहताशिम मुजतबा और मोहम्मद हुसैन मंजूर शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के सचिव डॉ. अदनान जियाई ने सफलतापूर्वक किया।
गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. सैयद अनवारुल हसन कादरी द्वारा कुरान की तिलावत से हुआ, जिसके बाद मजहर मियां रामपुरी ने नात पेश की। सौलत लाइब्रेरी के प्रवक्ता जीशान मुहम्मद खान मुराद ने सभी मेहमानों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।
गोष्ठी का सार: मेरा समाज मेरी पहचान
गोष्ठी में “मेरा समाज, मेरी पहचान” विषय पर बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि समाज एक ऐसा व्यवस्था है जहाँ लोग मिलजुल कर और प्रेम के साथ रहते हैं। एक सुखी समाज के लिए आपसी सहयोग और सम्मान ज़रूरी है, जहाँ सभी के लिए कानून समान हो और हर कोई नैतिक मूल्यों का पालन करे।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हम और आप जैसे लोग ही समाज का हिस्सा हैं, और जब तक हम सही नहीं होंगे, तब तक समाज प्रगति नहीं कर सकता। हमारी आदतें हमारी पहचान बनाती हैं। इसलिए, हमें खुद अच्छी आदतें अपनानी चाहिए और बच्चों को भी सिखाना चाहिए, ताकि हमारा समाज बेहतर हो सके। जब हम अच्छे व्यवहार, ईमानदारी और कड़ी मेहनत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं, तो हम न केवल अपने लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बनते हैं। यही आदतें एक व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक में बदलाव ला सकती हैं।
वक्ताओं ने कहा कि किसी की प्रशंसा करना और उसे प्रोत्साहित करना एक सकारात्मक व्यवहार है, जबकि किसी का मज़ाक उड़ाना, कमियाँ निकालना और मनोबल गिराना जलन और ईर्ष्या की निशानी है। कुछ शब्द चिंगारी की तरह भड़क कर पूरे परिवार या सामाजिक व्यवस्था को तबाह कर सकते हैं।
समाज की समस्याओं के समाधान पर बात करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इसमें हमारी सोच और हमारे कामों का बड़ा हिस्सा है। हमें सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूक होना चाहिए और आसपास के लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए। हर व्यक्ति का छोटा सा प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकता है।
एक विकसित समाज के लिए सभी का एकजुट होना और आपसी सहयोग करना आवश्यक है। इसके लिए लोगों के बीच अच्छे संबंध होने चाहिए, और एक-दूसरे का सम्मान करना ज़रूरी है। हमें विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और विचारों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि एक विकसित समाज इसी तरह पनपता है।
उपस्थितगण
इस कार्यक्रम में मौलाना मुहम्मद असलम जावेद उल कासमी, डॉ. मेहंदी हसन, इसरार हसन खान, डॉ. सैयद जाफर शाह, सैयद मुजतबा नदीम, प्रमिल कुमार शर्मा उर्फ निक्कू पंडित, मुहम्मद शाहिद शम्सी, अजीज बकाई, सूफी इब्बन खान, डॉ. अब्दुल सलाम, एडवोकेट सैयद आमिर मियां, साहिर अली खान, नौमान खान, शकील अहमद, इमरान सलीम शम्सी, फहीमा बी, लाइब्रेरियन मजहर मोईन खान, शहजादा रिजवान खान, इरफान उर रहमान खान और इशरत अली सहित कई प्रमुख व्यक्ति मौजूद थे।

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