नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2025।; हर साल 29 अक्टूबर को विश्व सोराइसिस दिवस (World Psoriasis Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को सोराइसिस जैसी त्वचा संबंधी ऑटोइम्यून बीमारी के बारे में जागरूक करना है। इस साल की थीम है “Psoriatic Disease and Mental Health” — यानी शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की जरूरत।
सोराइसिस एक ऐसी बीमारी है जो सिर्फ त्वचा को नहीं, बल्कि हृदय रोग, डायबिटीज और मानसिक तनाव जैसी कई अन्य बीमारियों को भी जन्म दे सकती है। दुनिया भर में करीब 12 करोड़ लोग इससे पीड़ित हैं।
🔹 क्या है सोराइसिस?
यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपनी ही त्वचा पर हमला करती है। इससे त्वचा पर लाल, खुजलीदार और मोटे धब्बे बन जाते हैं जो अक्सर सफेद परत से ढके होते हैं। यह संक्रामक नहीं है, यानी छूने से नहीं फैलता, लेकिन काफी दर्दनाक हो सकता है।
🔹 किस उम्र में होता है असर?
सोराइसिस आमतौर पर 15 से 25 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होता है। इसके पीछे जेनेटिक कारण और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी प्रमुख मानी जाती हैं। सर्दी, तनाव या संक्रमण जैसे कारण इसे और बढ़ा सकते हैं।
🔹 लक्षण
सबसे सामान्य रूप है प्लाक सोराइसिस, जिसमें कोहनी, घुटनों, कमर और सिर की त्वचा पर लाल धब्बे उभरते हैं। ये सूखे और खुजलीदार होते हैं। नाखूनों में गड्ढे पड़ना या उनका कमजोर होना भी एक संकेत है।
🔹 गंभीर स्थिति में क्या होता है?
गंभीर मामलों में सोरियाटिक आर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis) हो सकता है, जिससे जोड़ों में सूजन और दर्द होता है। कभी-कभी सिर पर असर पड़ने से बाल भी झड़ सकते हैं।
🔹 क्या चॉकलेट और कॉफी से बढ़ता है सोराइसिस?
हालांकि चॉकलेट या कॉफी हर व्यक्ति पर अलग असर डालती हैं, लेकिन अधिक मात्रा में चीनी और कैफीन सूजन व तनाव को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि डार्क चॉकलेट सीमित मात्रा में लेना ठीक है।
🔹 बचाव के उपाय
तनाव से बचें, योग और ध्यान करें।
ओमेगा-3 युक्त भोजन, फल और सब्जियां लें।
प्रोसेस्ड फूड, मीठा और शराब से दूरी रखें।
समय-समय पर त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें।
