प्रेगनेंसी में थायरॉइड क्यों बन सकता है खतरा, समय पर पहचान और सही देखभाल है जरूरी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में कई बड़े शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में थायरॉइड की समस्या एक गंभीर लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली परेशानी बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था में थायरॉइड असंतुलन मां और गर्भ में पल रहे शिशु, दोनों की सेहत पर गहरा असर डाल सकता है, इसलिए इसकी समय पर पहचान और सही इलाज बेहद जरूरी है।

जिंदल आईवीएफ के निदेशक एवं वरिष्ठ सलाहकार डॉ. उमेश जिंदल के अनुसार, थायरॉइड एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर और हार्मोन संतुलन को नियंत्रित करती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में hCG और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं, जिससे थायरॉइड को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यदि ग्रंथि इस अतिरिक्त जरूरत के अनुसार काम नहीं कर पाती, तो हाइपोथायरॉइड या हाइपरथायरॉइड जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, थायरॉइड से जुड़ी परेशानियां गर्भवती महिलाओं में सबसे आम हार्मोनल समस्याओं में से एक हैं। आंकड़ों के अनुसार, करीब 5 से 7 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं किसी न किसी प्रकार की थायरॉइड समस्या से प्रभावित होती हैं। इनमें से कई मामलों में लक्षण इतने हल्के होते हैं कि वे सामान्य प्रेगनेंसी के लक्षणों जैसे थकान, वजन में बदलाव या दिल की धड़कन तेज होने से अलग महसूस नहीं होते। इसी वजह से कई बार यह समस्या बिना पहचाने ही रह जाती है।

अगर गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड की समस्या को नियंत्रित न किया जाए, तो मां को एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, प्रीक्लेम्पसिया, समय से पहले डिलीवरी या डिलीवरी के बाद अधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं हाइपरथायरॉइड की स्थिति में दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है और वजन बढ़ने में दिक्कत आ सकती है।

बच्चे की सेहत पर भी थायरॉइड का गहरा असर पड़ता है। गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में शिशु पूरी तरह मां के थायरॉइड हार्मोन पर निर्भर रहता है। इसी समय उसके दिमाग और नर्वस सिस्टम का विकास होता है। ऐसे में थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जो महिलाएं गर्भधारण की योजना बना रही हैं या गर्भावस्था के शुरुआती चरण में हैं, उन्हें थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। खासतौर पर अगर पहले थायरॉइड की समस्या रही हो, परिवार में इसका इतिहास हो या बार-बार गर्भपात हुआ हो। समय पर जांच, सही दवाएं, आयोडीन युक्त संतुलित आहार और डॉक्टर की नियमित निगरानी से थायरॉइड की समस्या को सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

डॉ. जिंदल का कहना है कि समय पर पहचान और सही इलाज से थायरॉइड की समस्या होने के बावजूद भी ज्यादातर महिलाएं स्वस्थ गर्भावस्था पूरी कर सकती हैं और स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

 

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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें

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