रूस के अब तक के ‘सबसे बड़े’ ड्रोन हमले के बाद NATO ने क्यों तैनात किए फाइटर जेट?

पोलैंड की सीमाओं के करीब रूसी मिसाइलें, NATO ने बरती कड़ी सतर्कता

नई दिल्ली : रूस ने बुधवार को यूक्रेन पर 728 ड्रोन और 13 मिसाइलों से हमला किया, जिसे अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला बताया जा रहा है। इन ड्रोनों में 300 से अधिक ईरानी डिजाइन वाले शाहिद ड्रोन शामिल थे, जबकि मिसाइलों में किनझाल और इस्कंदर जैसी घातक मिसाइलें इस्तेमाल की गईं।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि यह हमला यूक्रेनी एयरबेस को निशाना बनाकर किया गया था और “सभी निर्धारित लक्ष्य” नष्ट कर दिए गए हैं।

यूक्रेन का जवाबी हमला: रूस में तीन की मौत
इस हमले के जवाब में यूक्रेन ने भी रूस पर ड्रोन हमला किया, जिसमें रूसी सीमा क्षेत्र कुर्स्क में तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक 5 वर्षीय बच्चा भी शामिल है। यह जानकारी स्थानीय गवर्नर ने साझा की।

NATO की प्रतिक्रिया: पोलैंड ने फाइटर जेट किए तैनात
रूसी हमले के बाद, NATO सदस्य देश पोलैंड ने अपने फाइटर जेट्स उड़ाए। पोलैंड की सशस्त्र सेना के ऑपरेशनल कमांड ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि उसने सभी रक्षा प्रणालियों को उच्चतम सतर्कता स्तर पर रखा है।

यह कार्रवाई रूसी मिसाइलों और ड्रोन के NATO सीमाओं के निकट आने की वजह से की गई, ताकि पोलैंड की हवाई सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ज़ेलेंस्की का बयान: यह शांति की कोशिशों पर हमला है
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इस हमले को “हमारे शहरों पर रूस का एक और बड़ा हमला” बताया। उन्होंने कहा:
“यह एक प्रतीकात्मक हमला है—ऐसे समय में जब शांति और संघर्षविराम की कोशिशें हो रही हैं, रूस इन सभी को नकार रहा है।”

हमला NATO सीमा के बेहद करीब
रूसी हमले का केंद्र पश्चिमी यूक्रेन रहा, खासतौर पर ल्वीव और वोलिन जैसे क्षेत्र जो पोलैंड से सटे हुए हैं। लुत्स्क और रिवने जैसे शहरों पर हमले ने NATO को चिंतित कर दिया कि कहीं ये मिसाइलें NATO एयरस्पेस में प्रवेश न कर जाएं।

पोलैंड में पूरी तैयारी, लेकिन कोई घुसपैठ नहीं
पोलैंड ने कहा कि F-16 जैसे फाइटर जेट्स तैनात किए गए, और ग्राउंड आधारित एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को सक्रिय किया गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी रूसी ड्रोन या मिसाइल पोलैंड की सीमा में प्रवेश नहीं कर सका।

सीमाओं पर तनाव, युद्ध में नई आक्रामकता
रूस-यूक्रेन युद्ध अब NATO सीमाओं के बेहद करीब आ गया है। रूस के बड़े हमले और NATO की तत्काल प्रतिक्रिया ने स्थिति को और भी संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकता है।

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