गुस्ताखी माफ़ हरियाणा-पवन कुमार बंसल
इमरजेंसी के दौरान हरियाणा में नसबंदी को लेकर भारी ज्यादतियाँ हुईं। कुंवारों तक के ऑपरेशन करा दिए गए। उस समय एक नारा खूब चला—“नसबंदी के तीन दलाल: इंदिरा–संजय–बंसीलाल।”
अफसरों ने भी जमकर मनमानी की। रोहतक के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर मित्तल साहब, सुभाष बत्रा से नाराज़ थे। दरअसल, बत्रा के पिता प्रकाश चंद, जो नगरपालिका रोहतक के प्रधान थे, ने मित्तल साहब के कहने पर कोई काम नहीं किया था। उस समय मित्तल साहब डिप्टी कमिश्नर नहीं थे।
बाद में जब मित्तल साहब डिप्टी कमिश्नर रोहतक बने और इमरजेंसी लग गई, तो अफसर बेहद ताकतवर हो गए। मित्तल साहब ने सुभाष बत्रा को मीसा में गिरफ्तार करने का ज़ुबानी आदेश दे दिया। बत्रा की किस्मत अच्छी थी कि उन्हें इसकी भनक लग गई।
सुभाष बत्रा के बंसीलाल के बेटे सुरिंदर से अच्छे संबंध थे। बत्रा छुपकर बंसीलाल के दिल्ली स्थित निवास पर पहुँचे और सुरिंदर को पूरी बात बताई। सुरिंदर उन्हें बाबूजी, यानी बंसीलाल, के पास ले गए।
बंसीलाल ने मित्तल साहब को हरियाणवी में समझा दिया और सुभाष बत्रा की गिरफ्तारी नहीं हुई। बाद में सुभाष बत्रा गृह राज्य मंत्री भी बने।
दुमछला:
वैसे इमरजेंसी में यह कलम घसीट भी मीसा में गिरफ्तार होने से बचा था—उसका ज़िक्र फिर कभी करेंगे। आज की पोस्ट सुभाष बत्रा के नाम।
पवन कुमार बंसल
लेखक एवं पत्रकार
गुरुग्राम, हरियाणा
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