जब मेनका गांधी ने सोनीपत के तत्कालीन एसपी से कहा—“नौकरी करना सिखा दूँगी।”

गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

हाल ही में गौ-हत्या के आरोप से जुड़े एक मामले में राजस्थान के दो युवकों के जले हुए शव हरियाणा के भिवानी जिले में मिलने की घटना ने एक पुराना किस्सा याद दिला दिया।

यह उस समय की बात है जब मेनका गांधी केंद्र सरकार में मंत्री थीं और हरियाणा के रिटायर्ड डीजीपी केपी सिंह तब दिल्ली से सटे सोनीपत जिले (जो अब कमिश्नरी बन चुका है) के पुलिस अधीक्षक थे। एक दिन वे अपने कार्यालय में बैठे थे कि अचानक फोन आया। उधर से एक महिला की आवाज आई—“नौकरी करना सिखा दूँगी।” फोन पर मेनका गांधी थीं। उस समय हरियाणा के मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला थे और रोहतक पुलिस रेंज के आईजी डॉ. जॉन वी. जॉर्ज।

बताया जाता है कि मेनका गांधी ने अपना सख्त संदेश सुनाकर फोन काट दिया। दरअसल, उन दिनों उनके संगठन के कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश से हरियाणा पशु लेकर आने वालों को पकड़कर थानों में मुकदमे दर्ज करवाने का दबाव बनाते थे। शिकायतें थीं कि बिना पर्याप्त जांच के कार्रवाई की जा रही है।

एसपी केपी सिंह ने थानेदारों को निर्देश दिए थे कि बिना जांच-पड़ताल के कोई मुकदमा दर्ज न किया जाए। इसी बात से संगठन से जुड़े कुछ लोग नाराज़ हो गए और सीधे मेनका गांधी से संपर्क कर लिया। इसके बाद यह फोन आया।

सिंह ने इस बारे में आईजी डॉ. जॉर्ज से चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला से भी बात करने की सलाह दी। बताया जाता है कि चौटाला ने आश्वस्त करते हुए कहा—“सिंह साहिब, आप चिंता न करें, वे ऐसे ही फोन करती रहती हैं।”

दुमछल्ला

एक और प्रसंग का जिक्र किया जाता है। फरीदाबाद में किसी व्यक्ति का पालतू कुत्ता (टॉमी) गुम हो गया। पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट मालिक ने सीधे मेनका गांधी से शिकायत कर दी। इसके बाद उन्होंने फरीदाबाद की तत्कालीन डीसीपी आस्था मोदी को फोन किया।

इसी तरह एक बार शिकायत मिली कि फरीदाबाद से गुजर रही एक मालगाड़ी में ले जाई जा रही गायों के लिए पर्याप्त चारा नहीं है। बताया जाता है कि तत्कालीन उपायुक्त आनंद मोहन को हस्तक्षेप कर ट्रेन रुकवानी पड़ी।

हरियाणा से जुड़े ऐसे कई किस्से राजनीतिक गलियारों में चर्चित रहे हैं। कुछ लोग इन्हें प्रशासनिक सख्ती मानते हैं, तो कुछ इन्हें अति-सक्रियता का उदाहरण बताते हैं।

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