जब मेनका गांधी ने मानेसर के ए सी पी मलिक को देख लेने की धमकी दी
जब मेनका गांधी ने मानेसर के एसीपी को “देख लेने” की चेतावनी दी
गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
सोनीपत के तत्कालीन एसपी से जुड़ी नोकझोंक का जिक्र हुआ तो कुछ ही देर में इतने किस्से सामने आ गए कि “मेनका और हरियाणा पुलिस” शीर्षक से पूरी किताब लिखी जा सकती है। यह भी एक पुराना प्रसंग है।
उस समय मेनका गांधी पशु अधिकारों को लेकर सक्रिय थीं। मानेसर में संदीप मलिक एसीपी के पद पर तैनात थे और गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर अलोक मित्तल थे।
बताया जाता है कि एक रात एसीपी मलिक गश्त पर थे, तभी खेड़की दौला क्षेत्र से सूचना मिली कि कुछ लोगों ने बकरियां ले जा रहे व्यक्तियों को रोककर हंगामा कर रखा है। आरोप था कि पशुओं को वाहन में ठूंसकर ले जाया जा रहा है। मौके पर पहुंचने पर पाया गया कि कथित रूप से कुछ लोगों ने गाड़ियों के शीशे भी तोड़ दिए थे।
एसीपी के पहुंचते ही हंगामा कर रहे लोग वहां से चले गए। पुलिस ने जांच के बाद पांच वाहन मालिकों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया।
इधर संबंधित एक्टिविस्टों ने सीधे मेनका गांधी को फोन कर शिकायत की कि पुलिस ने कथित रूप से पैसे लेकर पशु ले जा रहे लोगों को छोड़ दिया है। अगली सुबह जब कमिश्नर अलोक मित्तल ने एसीपी से जानकारी ली तो मलिक ने स्पष्ट किया कि संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया जा चुका है। मामला शांत हो गया।
हालांकि दोपहर में मेनका गांधी का फोन एसीपी मलिक के पास आया। बताया जाता है कि बातचीत के दौरान उन्होंने कड़े लहजे में सीबीआई जांच तक की बात कही। मलिक ने भी शांत स्वर में अपना पक्ष रखा। बाद में बातचीत का लहजा नरम पड़ गया।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ कथित एक्टिविस्ट पशुओं को पकड़कर झज्जर के पास स्थित एक केंद्र में ले जाते थे।
यह प्रसंग हरियाणा पुलिस और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के बीच उस दौर में रहे तनावपूर्ण संबंधों की एक झलक के रूप में अक्सर चर्चा में आता रहा है।
