जब देवीलाल ने बुढ़ापा पेंशन लागू की तो अफसरों ने उनके नरवाना से विधायक टेक चंद नैन के पिता की भी पेन्शन बना दी

गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

“हंगामा है बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है…”

हरियाणा सरकार द्वारा बुढ़ापा पेंशन में आय (इनकम) का मानदंड तय किए जाने को लेकर सियासी हलचल तेज है। सवाल यह है कि बुजुर्गों को दी जाने वाली पेंशन में आय की शर्त होनी चाहिए या नहीं?

जब चौधरी देवीलाल ने बुढ़ापा पेंशन योजना की शुरुआत की थी, तब अफसरशाही की कार्यप्रणाली ऐसी थी कि नरवाना से विधायक टेकचंद नैन के पिता की भी पेंशन बन गई। इस मामले को तत्कालीन विधायक, पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता शमशेर सिंह सुरजेवाला ने उठाया था। तब सरकार की ओर से सफाई दी गई कि यह पेंशन गलती से बन गई थी।

अब इस मुद्दे पर इनेलो नेता अभय चौटाला ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि देवीलाल ने बुढ़ापा पेंशन बुजुर्गों के सम्मान के लिए शुरू की थी, इसलिए इसमें आय की कोई शर्त नहीं होनी चाहिए। अभय चौटाला ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो वे “सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे।”

यह मुद्दा अब केवल नीति का नहीं, बल्कि सम्मान बनाम पात्रता की बहस बन चुका है।

पाठक अपनी राय दें—
क्या बुढ़ापा पेंशन में आय की शर्त होनी चाहिए या बिना किसी शर्त हर बुजुर्ग को पेंशन मिलनी चाहिए?

 

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