व्लादिमीर पुतिन भारत में; 23वाँ भारत-रूस वार्षिक समिट ऐसे समय में जब अमेरिका कर रहा है दबाव — रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर होगी चर्चा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत यात्रा पर गुरुवार की शाम नई दिल्ली पहुंचे। 5 दिसंबर को नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक है। इस 23वें वार्षिक भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन (India-Russia Annual Summit 2025) का आयोजन ऐसे वक्त पर हो रहा है, जब अमेरिका रूस के साथ भारत के रिश्तों को लेकर दबाव बना रहा है। दोनों देश इस सम्मेलन में ट्रेड, ऊर्जा साझेदारी के साथ-साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर भी फोकस करेंगे।

 इस बैठक में क्या हो सकता है — प्रमुख एजेंडा

रक्षा क्षेत्र में चर्चा के केंद्र में S-500 एयर डिफेंस सिस्टम, Su-57 फिट‑जेट और अतिरिक्त S-400 वायु रक्षा प्रणाली हो सकते हैं। रूस की ओर से Su-57 के निर्माण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा ऊर्जा एवं तेल आयात, उर्जा सुरक्षा, व्यापार विस्तार और द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी पर भी बात होगी। रूस भारत को तेल निर्यात पर जोर दे रहा है — खासकर पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिका की नीतियों के बीच।
रक्षा व व्यापार के अलावा, न्यूक्लियर ऊर्जा, तकनीकी सहयोग, निवेश व आर्थिक लेन-देन में सहजता लाने जैसे विषय भी चर्चा में हो सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि और महत्व

यह दौरा इस कारण विशेष है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह पुतिन का पहली बार भारत दौरा है। पश्चिमी देश विशेषकर अमेरिका, भारत से रूस से अपने तेल व हथियार लेन-देन को बंद करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में भारत-रूस के बीच दोस्ती व रणनीतिक साझेदारी का यह सम्मेलन दोनों देशों की संप्रभुता और सामरिक स्वायत्तता का प्रतीक माना जा रहा है।

विदेश एवं रक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अगर इस सम्मेलन में Su-57, S-500 जैसे सौदे होते हैं, तो भारत की सुरक्षा व रक्षा क्षमता में बड़े बदलाव की शुरुआत होगी। इसके साथ ही यह भारत को रूस तथा पश्चिम — दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की ताकत भी देगा।

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